जून 2020 में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना एक परिवर्तनकारी पहल है। यह पहल रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं (वेंडर्स) को औपचारिक संस्थाओं यानी बैंकों से ऋण सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को सुरक्षित और विस्तारित करने में सहायता करती है।
योजना की प्रमुख उपलब्धियां

- ऋण सहायता: लगभग 1 करोड़ आवेदकों को ऋण की सुविधा प्रदान की गई और बिना किसी गारंटी (कोलेटरल फ्री) के 17,800 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण राशि वितरित की गई।
- बड़ी संख्या में लाभार्थी: औपचारिक वित्तीय संस्थाओं से जोड़कर 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को सशक्त बनाया गया।
- इस योजना के कारण लाभार्थियों की औसत आय में प्रति वर्ष 20% की वृद्धि दर्ज की गई।
- महिला सशक्तीकरण: लक्षित वित्तीय सहायता के माध्यम से 34.81 लाख महिला स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिला है।
- डिजिटल समावेशन: 55 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल तकनीकों से जोड़ा गया, जिससे कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिला है।
- पुरस्कार: इस योजना को नवाचार श्रेणी (केंद्र स्तर) में 'प्रधानमंत्री लोक प्रशासन में उत्कृष्टता पुरस्कार (2023)' से सम्मानित किया गया।
पीएम स्वनिधि के बारे में
- संबंधित मंत्रालय: केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय।
- प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना।
- योजना-अवधि: जून 2020 से 2030 तक।
- इसे 2025 में पुनर्गठित किया गया और ऋण देने की अवधि को 2024 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2030 तक कर दिया गया।
- परिव्यय: 7,332 करोड़ रुपये।
- कार्यान्वयन: केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा संयुक्त रूप से।
- उद्देश्य: रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को पहचान प्रदान करने, बिना कुछ गिरवी रखे कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करके वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने जैसे उपायों से उनकी चिंताओं को दूर करना और चुनौतियों का समाधान करना।