भारत अब प्रायोगिक ड्रोन परियोजनाओं से आगे बढ़कर एक विनियमित ड्रोन तंत्र को अपना रहा है। देश में अब 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन (विशिष्ट पहचान संख्या - UIN) मौजूद हैं।
- यह विस्तार लोक सेवा वितरण, अवसंरचना प्रबंधन, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा के स्वरूप को बदल रहा है।

ड्रोन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से लोक सेवा वितरण में परिवर्तन
- कृषि और आजीविका: नमो ड्रोन दीदी योजना (2023) महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन प्रदान करती है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका के अवसर उत्पन्न किए जा सकें।
- भूमि मानचित्रण: स्वामित्व (SVAMITVA) योजना (2020) ग्रामीण आबादी के सर्वेक्षण के लिए ड्रोन का उपयोग करती है। इससे भूमि विवाद सुलझते हैं और संपत्ति कार्ड के माध्यम से संस्थागत ऋण तक पहुंच आसान होती है।
- राजमार्गों की निगरानी: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने प्रगति की ट्रैकिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग और विसंगतियों की जांच के लिए राजमार्ग परियोजनाओं की मासिक ड्रोन-वीडियो मैपिंग अनिवार्य कर दी है। इसका उपयोग विवाद समाधान में साक्ष्य के रूप में भी किया जाता है।
- आपदा प्रबंधन: उदाहरण के लिए - उत्तर-पूर्व प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग और पहुंच केंद्र (NECTAR) के ड्रोन्स बाढ़ एवं भूस्खलन के दौरान वास्तविक समय (real-time) के दृश्य प्रदान करते हैं। इससे त्वरित आकलन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव कार्यों में मदद मिलती है।
- रेलवे निगरानी: रेल मंत्रालय पटरियों, पुलों और दुर्गम क्षेत्रों में अवसंरचना के निरीक्षण के लिए मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का उपयोग कर रहा है। इससे रखरखाव एवं सुरक्षा में सुधार हुआ है।
- रक्षा अनुप्रयोग: ड्रोन सीमा सुरक्षा, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों में सहायक हैं। रडार और वायु-रक्षा नेटवर्क के साथ एकीकृत होकर, ये खतरों का तेजी से पता लगाने तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा (जैसे: ऑपरेशन सिंदूर) को बढ़ाते हैं।
भारत में ड्रोन अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाना
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