लोकसभा में अधिकरण (ट्रिब्यूनल) सुधार विधेयक, 2026 पारित हुआ | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026, 2021 के अधिनियम का स्थान लेता है, और 16 न्यायाधिकरणों में चयन, प्रदर्शन समीक्षा और अनुशासन के लिए एक राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (एनटीसी) की स्थापना करता है।
  • एनटीसी में एक अध्यक्ष (पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश/हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश), दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाएगी।
  • प्रमुख विशेषताओं में मामलों की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय न्यायाधिकरण डेटा ग्रिड शामिल है, जो न्यायिक स्वतंत्रता, पारदर्शी चयन और तीन महीने के भीतर समय पर नियुक्तियों को सुनिश्चित करता है।

In Summary

अधिकरण (ट्रिब्यूनल) सुधार विधेयक, 2026 का उद्देश्य अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 को प्रतिस्थापित करना है। इसमें मद्रास बार एसोसिएशन के मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रावधान शामिल किए गए हैं।

मुख्य प्रावधान

विशेषताएं

2026 के विधेयक में प्रावधान

राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) 

केंद्र सरकार द्वारा एक सांविधिक निकाय स्थापित किया जाएगा। यह 16 अधिकरणों (ट्रिब्यूनलों) में सदस्यों के चयन, उनके प्रदर्शन की समीक्षा और अनुशासन की निगरानी करेगा।

NTC की संरचना

एक अध्यक्ष — उच्चतम न्यायालय  के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश; दो न्यायिक सदस्य — उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश; तथा दो तकनीकी सदस्य — संबंधित क्षेत्र में 25 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाले।

NTC के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल

नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। अध्यक्ष या न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श किया जाएगा। कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।

अधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल 

सदस्यों की नियुक्ति खोज सह चयन समिति की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। 

अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जबकि सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो।

राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड

एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसमें मामलों से संबंधित जानकारी उपलब्ध होगी। इससे अधिकरणों के प्रदर्शन की निगरानी की जा सकेगी।

 

विधेयक का महत्व

  • न्यायिक स्वतंत्रता: अधिकरणों के कामकाज को शक्तियों के पृथक्करण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है।
  • स्वतंत्र निगरानी: 16 अलग-अलग अधिकरणों के प्रशासन और अनुशासन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां: उम्मीदवारों के मूल्यांकन की जिम्मेदारी न्यायिक नेतृत्व वाली खोज सह चयन समिति को देकर राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना कम की गई है।
  • समय पर नियुक्तियां: सिफारिशें प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर केंद्र सरकार को अधिकरणों में नियुक्तियों को अंतिम रूप देना होगा।
  • डिजिटल माध्यम से जवाबदेही तय करना: राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड के माध्यम से मामलों और संस्थागत प्रदर्शन की केंद्रीकृत निगरानी की जाएगी। 
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राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड

एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल जिसे अधिकरणों के कामकाज और मामलों की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

शक्तियों का पृथक्करण

यह एक संवैधानिक सिद्धांत है जिसके तहत सरकार की तीन शाखाएँ - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - अलग-अलग कार्य करती हैं और एक-दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करतीं, जिससे सत्ता का दुरुपयोग रोका जा सके।

खोज सह चयन समिति

एक समिति जो अधिकरणों में सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों की पहचान और चयन करती है। इसका उद्देश्य नियुक्तियों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में कहा गया है।

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