“मेडटेक में AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्वास्थ्य-देखभाल सेवा में क्रांति” पर ज्ञान पत्र जारी किया गया | Current Affairs | Vision IAS

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  • भारत का लक्ष्य नैदानिक ​​विविधता और विनिर्माण का लाभ उठाते हुए जिम्मेदार एआई-सक्षम मेडटेक में अग्रणी बनना है।
  • मेडटेक में एआई स्वास्थ्य सेवा को विकेंद्रीकृत करता है, जोखिमों का पूर्वानुमान लगाता है और दक्षता में सुधार करता है, जिससे चिकित्सकों की कमी की समस्या का समाधान होता है।
  • एआई को अपनाने में आने वाली बाधाओं में खंडित डेटा, नियामकीय कमियां और प्रोत्साहन/प्रतिपूर्ति की कमी शामिल हैं।

In Summary

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा जारी यह रिपोर्ट बताती है कि भारत अपनी विविध चिकित्सा विशेषज्ञता और मजबूत विनिर्माण आधार का लाभ उठाकर जिम्मेदार AI-आधारित मेडटेक के क्षेत्र में विश्व को नेतृत्व प्रदान कर सकता है। 

भारत का मेडटेक उद्योग

  • मेडटेक का अर्थ ऐसे चिकित्सीय उपकरण और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों से हैं, जिनका उपयोग मरीजों की देखभाल के लिए किया जाता है। इसमें चिकित्सा उपकरण, रोग की पहचान की तकनीक और AI आधारित सॉफ्टवेयर शामिल हैं।
  • मेडटेक एक उभरता हुआ यानी सनराइज उद्योग है और इसका कारोबार वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • भारत एशिया में चिकित्सा उपकरणों का चौथा सबसे बड़ा बाजार है। भारत से आगे केवल जापान, चीन और दक्षिण कोरिया हैं।

मेडटेक में AI की भूमिका

  • विकेन्द्रीकृत स्वास्थ्य-देखभाल सेवा:  AI आधारित जाँच उपकरणों की मदद से आशा/ANM जैसी स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी जैसी बीमारियों की शुरुआती जांच कर सकती हैं।
    • भारत में प्रत्येक 10,000 लोगों पर केवल 9.6 डॉक्टर हैं, जबकि वैश्विक औसत 18.3 डॉक्टर प्रति 10,000 लोग है। 
  • जाँच के समय में कमी: AI की मदद से बीमारी की जांच का समय 24–72 घंटे से घटकर कुछ मिनट हो सकता है।
  • जोखिम का अनुमान: मशीन लर्निंग का उपयोग करके बीमारी के खतरे  का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही, बाजार में उपलब्ध चिकित्सा उत्पादों की बिक्री के बाद निगरानी भी की जा सकती है।
  • दक्षता में सुधार: AI की मदद से वास्तविक समय में डेटा का विश्लेषण, बीमारियों या समस्याओं की स्वतः पहचान, मरीजों की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता देना और डॉक्टरों को इलाज संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलती है। इससे स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं की दक्षता और उत्पादकता बढ़ती है। 

मेडटेक में AI को अपनाने में बाधाएं

  • अलग-अलग और बिखरा हुआ अस्पताल डेटा: अस्पतालों में मरीजों से संबंधित डेटा अलग-अलग जगहों और प्रणालियों में बिखरा हुआ है। साथ ही भारतीय आबादी से जुड़े वास्तविक डेटा की कमी की वजह से AI मॉडल की सही जांच और पुष्टि नहीं हो पाती है। इन कारणों से भारत में AI मॉडल को स्थानीय स्तर पर उपयोग के लिए मान्य करना कठिन हो जाता है। 
  • विनियामक व्यवस्था में कमी: AI सॉफ्टवेयर में बहुत तेजी से नए अपडेट आते हैं, जबकि विनियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया में काफी समय लगता है। इसके कारण बेहतर और नए AI एल्गोरिदम को स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं में लागू करने में देरी होती है।
  • AI अपनाने के लिए प्रोत्साहन की कमी: AI तकनीक की लागत अधिक होने के कारण इसके उपयोग को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता। उदाहरण के लिए, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में AI आधारित रोग पहचान के लिए अलग से भुगतान की व्यवस्था नहीं है।
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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)

यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक स्वास्थ्य बीमा योजना है जिसका उद्देश्य माध्यमिक और तृतीयक स्तर पर अस्पताल में भर्ती होने के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है। वर्तमान में, इसमें AI-आधारित रोग पहचान के लिए अलग से भुगतान की व्यवस्था नहीं है, जो इसके अपनाने में एक बाधा है।

विनियामक व्यवस्था (Regulatory Framework)

यह नियमों, कानूनों और दिशानिर्देशों का एक समूह है जो किसी विशेष उद्योग या गतिविधि के संचालन को नियंत्रित करता है। परमाणु ऊर्जा के संदर्भ में, इसमें सुरक्षा, सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को सुनिश्चित करने वाले नियम शामिल हैं।

मशीन लर्निंग (Machine Learning)

यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक उपक्षेत्र है जो कंप्यूटर सिस्टम को स्पष्ट रूप से प्रोग्राम किए बिना डेटा से सीखने और भविष्यवाणियां करने या निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम डेटा में पैटर्न की पहचान करके और उन पैटर्नों के आधार पर मॉडल को परिष्कृत करके कार्य करते हैं।

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