केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की “गैर-जीवाश्म ऊर्जा” शब्दावली में नवीकरणीय ऊर्जा के साथ परमाणु ऊर्जा भी शामिल है।
- मार्च 2019 में केंद्र सरकार ने बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को भी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में शामिल किया।
प्रमुख उपलब्धियां

- गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता: 31 जुलाई, 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्थापित क्षमता 300.50 गीगावाट से अधिक हो गई। यह कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 54% से अधिक है।
- 2025–26 में वृद्धि: इस अवधि में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जिसमें 44.6 गीगावाट सौर ऊर्जा और 6 गीगावाट पवन ऊर्जा की वृद्धि शामिल है।
- पवन ऊर्जा क्षमता में वृद्धि: पवन ऊर्जा क्षमता 2014 की 21 गीगावाट से बढ़कर 2026 में 58.14 गीगावाट हो गई।
- 2030 के लक्ष्य की दिशा में प्रगति: भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य का 60% से अधिक पहले ही प्राप्त कर लिया है। यह लक्ष्य पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) का हिस्सा है।
प्रमुख चुनौतियां
- तकनीकी और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी बाधाएं: भारत अभी भी नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के लिए आयात पर अधिक निर्भर है। विशेष रूप से सौर सेल का लगभग 90% तथा पॉलीसिलिकॉन और वेफर का 98% आयात किया जाता है। ये आयात मुख्य रूप से चीन से किए जाते हैं।
- विद्युत ग्रिड और भंडारण क्षमता की कमी: सौर और पवन ऊर्जा लगातार एक समान उपलब्ध नहीं होती, इसलिए ग्रिड संचालन की स्थिरता के लिए ऊर्जा भंडारण आवश्यक है। भारत को वर्ष 2030 तक 60 गीगावाट से अधिक भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान में यह 5 गीगावाट से कम है।
- न्यायसंगत परिवर्तन (जस्ट ट्रांजीशन) और सामाजिक बाधाएं: स्वच्छ ऊर्जा अपनाने से झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे कोयला-निर्भर राज्यों में रोजगार और आजीविका के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।