विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 'हिमालयी क्षेत्र में वनों की आग, इसके प्रतिकूल प्रभाव और शमन उपाय' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
कोई विशेष अध्ययन नहीं: हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं के बीच संबंध को प्रमाणित करने वाला कोई विशेष अनुभवजन्य अध्ययन नहीं है। | क्षेत्र-विशिष्ट अध्ययन: अलग-अलग हिमालयी क्षेत्रों में पिछली घटनाओं और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अध्ययन किए जाने चाहिए। इनके निष्कर्षों को वनाग्नि की रोकथाम और प्रबंधन के लिए पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों में शामिल किया जाना चाहिए। |
समेकित राष्ट्रीय रिकॉर्ड का अभाव: वनाग्नि के कारण होने वाली मौतों और अन्य हताहतों का कोई एकीकृत राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं है। इससे जवाबदेही तय करने और तथ्यों के आधार पर नीतियां बनाने में कठिनाई होती है। | राज्य सरकारों द्वारा वनाग्नि से होने वाली मौतों/हताहतों और दिए गए मुआवजे का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए। इससे प्रभावी निगरानी और बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। |
विदेशी ध्रुवीय-कक्षा वाले उपग्रहों (MODIS) पर निर्भरता: इससे दिन के अलग-अलग समय में वनाग्नि की निगरानी में अंतर रह जाता है। यानी 01:30–10:30 बजे और 13:30–22:30 बजे के बीच उपग्रह की कोई निगरानी उपलब्ध नहीं होती। | अंतरिक्ष विभाग द्वारा ऐसा भूस्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) प्रक्षेपित किया जाना चाहिए, जो 24 घंटे वनाग्नि की निगरानी करने में सक्षम हो।
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ऐतिहासिक-पारिस्थितिक साक्ष्यों की कमी: चीड़ के पेड़ों की बढ़ती संख्या और वनाग्नि को बढ़ाने में इसकी भूमिका का अब तक पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया है। | वन अनुसंधान संस्थान द्वारा विशेष ऐतिहासिक-पारिस्थितिक अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में समय के साथ वन संरचना में हुए परिवर्तनों का पता लगाया जा सके। |
पश्चिमी हिमालय में आक्रामक पेड़ प्रजातियों के विस्तार के बावजूद, उन्हें नियंत्रित करने या समाप्त करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किए गए हैं। | आक्रामक प्रजातियों की समाप्ति के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए। साथ ही, पश्चिमी हिमालय में बांज/शाहबलूत (ओक) और देवदार के पुनर्जनन के लिए ‘हिमालयन ओक एवं देवदार पुनर्जनन मिशन’ शुरू किया जाना चाहिए। |
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