'व्यवसाय करने की सुगमता' यानी इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस (EoDB) का अर्थ ऐसी विनियामक और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें व्यवसायों को प्रक्रिया संबंधी अनावश्यक बाधाओं से बचते हुए व्यवसाय शुरू करने, चलाने, विस्तार करने और बंद करने की सुविधा हो।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- वैश्विक रैंकिंग में सुधार: विश्व बैंक समूह के 'व्यवसाय सुगमता सूचकांक' में 190 अर्थव्यवस्थाओं में भारत की रैंकिंग 2015 में 142वीं थी, जो सुधरकर 2020 में 63वीं हो गई।
- विश्व बैंक अब यह सूचकांक प्रकाशित नहीं करता है।
- प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग में सुधार: इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (IMD) के विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में विश्व की 63 अर्थव्यव्यवस्थाओं में भारत 2022 में 6 स्थानों का सुधार करके 37वें स्थान पर पहुँच गया।
- व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया आसान हुई: मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2016 में केवल 502 थी, जो बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 2.23 लाख से अधिक हो गई। इन स्टार्टअप्स ने प्रत्यक्ष तौर पर औपचारिक रोजगार के 23.3 लाख अवसर उत्पन्न किए।
- जिला-स्तरीय दृष्टिकोण: ‘निर्यात हब के रूप में जिले’ पहल के माध्यम से नियमों को सरल बनाया जा रहा है और आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित अवसंरचना सुविधाओं को जिलों तक पहुँचाया जा रहा है।
व्यवसाय सुगमता में समस्याएं और समिति के सुझाव | |
वर्तमान समस्याएं | समिति के सुझाव |
अलग-अलग विनियामकीय व्यवस्थाएं: एक-दूसरे से मिलते-जुलते या आपस में टकराने वाले कानूनों, लाइसेंस और अनुपालन वाले नियमों के बोझ के कारण व्यवसायों की लागत बढ़ जाती है। | अलग-अलग लाइसेंस लेने की व्यवस्था समाप्त करके “एक लाइसेंस–एक नवीनीकरण” व्यवस्था लागू करनी चाहिए और जोखिम की गंभीरता के आधार पर व्यवसाय संबंधी नियम बनाने चाहिए। |
राज्यों में या स्थानीय स्तर पर व्यवसाय सुगमता की कमजोर व्यवस्था | जिला व्यवसाय सुधार कार्य योजना का विस्तार करने और सभी अनुमोदनों (मंजूरियों) को राष्ट्रीय सिंगल विंडो प्रणाली के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है। |
अनुमोदन में देरी: लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण-पत्र और नवीनीकरण के मामले में | समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित करें, निर्धारित समय में निर्णय न होने पर स्वतः अनुमोदन और स्वतः नवीनीकरण की व्यवस्था की जाए। |
राज्यों में असमान क्रियान्वयन: सुधारों के बावजूद वास्तविक स्थिति में सुधार नहीं होता। | व्यवसाय सुधार कार्य योजना को परिणाम-उन्मुख बनाया जाए, जिसमें वास्तविक स्थिति का सत्यापन और स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा लेखा-परीक्षण शामिल हो। |
MSME को ऋण प्राप्त करने में कठिनाई: जमानत (कोलेटरल) रखने और कई दस्तावेजों की आवश्यकताएँ कार्यशील पूंजी प्राप्त करने में बाधा डालती हैं। | उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण का विस्तार करें, ऋण गारंटी बढ़ाएं, बिना जमानत रखे ऋण देने की व्यवस्था की जाए और संस्थान की वित्तीय स्थिति (कैश फ्लो) के आधार पर ऋण देने की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाये। |
निर्यात और सीमा शुल्क संबंधी बाधाएँ: अलग-अलग प्रक्रियाएँ और सीमा-शुल्क मंजूरी की धीमी प्रक्रिया। | व्यवसाय का डिजिटलीकरण करें और भारतीय कस्टम इलेक्ट्रॉनिक गेटवे (ICEGATE) को AI आधारित बनाया जाए जिससे निकासी (क्लीयरेंस) को आसान बनाया जा सके। |