अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ नामक विधेयक पारित किया। इसमें रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
- यह विधेयक अभी अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से पारित होना बाकी है।
लिंडसे ओ. ग्राहम विधेयक के बारे में
- यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों—चीन, भारत, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया—से आयातित वस्तुओं पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
- भारत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है। इसलिए इस विधेयक से अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ लगने का जोखिम बढ़ सकता है।
- अतिरिक्त टैरिफ से भारत-अमेरिका व्यापार प्रभावित हो सकता है।
- भारत पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच और सस्ती रूसी ऊर्जा की खरीद के बीच चुनाव करने का दबाव बढ़ सकता है।
- इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, भारत-अमेरिका व्यापार और दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने चार उच्च न्यायालयों—मद्रास, कलकत्ता, मध्य प्रदेश और कर्नाटक—में 30 न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की।
न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया
- उच्चतम न्यायालय (SC) और उच्च न्यायालय (HC) के न्यायाधीशों की औपचारिक नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम (वरिष्ठ न्यायाधीशों का समूह) की अनुशंसा पर की जाती है।
- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अनुच्छेद 217 के तहत नियुक्त होते हैं।
- उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति:
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI): राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं। परंपरा के अनुसार, SC के वरिष्ठतम पात्र न्यायाधीश को CJI नियुक्त किया जाता है।
- उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश: राष्ट्रपति, CJI और आवश्यक समझे जाने वाले अन्य न्यायाधीशों से परामर्श के बाद नियुक्ति करते हैं।
- उच्च न्यायालय (HC) में नियुक्ति:
- मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं। इसके लिए CJI और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श किया जाता है।
- HC के अन्य न्यायाधीश: राष्ट्रपति CJI, संबंधित राज्य के राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करते हैं।
11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक भोपाल में संपन्न हुई, जिसमें भोपाल घोषणा-पत्र (Bhopal Declaration) को अपनाया गया।
भोपाल घोषणा-पत्र के बारे में
- यह घोषणा-पत्र ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
- इसमें अग्रलिखित क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की गई: रचनात्मक उद्योग, यूनेस्को विरासत सूची में बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रिया, सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियाँ, रचनाकारों के अधिकारों की सुरक्षा, संग्रहालय और पुस्तकालय आदि।
- स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री (विकसित करने के लिए एक पायलट पहल शुरू करने की घोषणा की गई, जिससे कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
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1 sourceहाल ही में सरकार ने लखनऊ में अपनी तरह का पहला ‘इको-एजुकेशनल हब’—प्रकृति ज्ञान धाम शुरू किया।
इको-एजुकेशनल हब के बारे में
- इसे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत CSIR–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) ने विकसित किया है।
- इसका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान और आम लोगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित करना है।
- यहाँ अनुभवात्मक और संवाद आधारित तरीके से सीखने के माध्यम से विज्ञान को आम लोगों के लिए सरल और सुलभ बनाया गया है।
- प्रमुख विशेषताएँ और क्षेत्र:
- पवन/PAaVan (प्रकृति की सराहना के लिए पौधे और संबंधित वनस्पतियां) मार्ग: एक व्याख्यात्मक विरासत पथ, जहाँ विभिन्न पौधों और वनस्पतियों के बारे में जानकारी दी जाती है।
- विभव एनक्लेव: दुर्लभ, संकटापन्न और विलुप्ति के खतरे वाली पौधों की प्रजातियों के लिए विशेष क्षेत्र।
- भैरव एनक्लेव: विभिन्न राज्य वृक्ष/राज्य पौधों का संग्रह।
- अन्य आकर्षण:बम्बूस्टेम और भारतीय विरासत उद्यान।
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1 sourceटाइफून डॉल्फिन ने पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत में दो बार लैंडफॉल किया, जिसके कारण बीजिंग में उच्चतम स्तर की रेड अलर्ट चेतावनी जारी की गई।
टाइफून के बारे में
- टाइफून पश्चिमी उत्तरी प्रशांत क्षेत्र में बनने वाले प्रबल उष्णकटिबंधीय चक्रवात होते हैं।
- प्रमुख क्षेत्र: चीन, जापान, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम और दक्षिण चीन सागर।
- तीव्रता:
- टाइफून: लगभग 118–119 किमी/घंटे या उससे अधिक की पवन गति।
- सुपर टाइफून: 185 किमी/घंटे या उससे अधिक की पवन गति।
उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बारे में
- परिभाषा: ये उष्ण केंद्र वाले, वाताग्र रहित और निम्न दबाव वाली प्रणाली हैं, जो उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्रों में विकसित होती हैं और इनमें संगठित तथा बंद वायु संचरण होता है।
- उत्पन्न होने के लिए आवश्यक दशाएं: समुद्र की सतह का उच्च तापमान (SST), समुद्र की उष्ण सतह से वाष्पित होने वाला जलवाष्प जो इसका प्रमुख ऊर्जा स्रोत है, कोरिऑलिस बल की उपस्थिति, कम ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण (Low Vertical Wind Shear), पहले से उपस्थित निम्न दबाव का क्षेत्र/विक्षोभ, वायुमंडलीय अस्थिरता, मध्य क्षोभमंडल में अधिक आर्द्रता।
- विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नाम: उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को अलग-अलग क्षेत्रों में हरिकेन, टाइफून, विली-विली आदि नामों से जाना जाता है।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने ‘बैंक इन ए बॉक्स’ शुरू किया। इसके माध्यम से शहरी सहकारी बैंकों को एक ही एकीकृत मंच पर मूल बैंकिंग प्रणाली और कई आधुनिक बैंकिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
बैंक इन ए बॉक्स के बारे में
- यह पहले से तैयार बैंकिंग सेवाओं का एक पैकेज है। इसके माध्यम से वित्तीय संस्थान क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्मों की सहायता से पूरी तरह कार्यशील बैंकिंग सेवाओं को आसानी से शुरू और संचालित कर सकते हैं।
- बैंक इन ए बॉक्स बनाम बैंकिंग एज अ सर्विस (BaaS):
- बैंक इन ए बॉक्स: बैंकिंग समाधानों का एक पहले से तैयार पैकेज प्रदान करता है, जिससे संस्थान सभी आवश्यक सुविधाओं को एक साथ प्राप्त करके डिजिटल बैंकिंग सेवा शुरू कर सकते हैं।
- बैंकिंग एज अ सर्विस: यह गैर-बैंकिंग थर्ड पार्टी संस्थाओं को एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) के माध्यम से विशिष्ट बैंकिंग सेवाओं को अपने प्लेटफार्म से जोड़ने की सुविधा देता है। इससे सेवाओं को आवश्यकतानुसार जोड़ना और उनका विस्तार करना आसान होता है।
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1 sourceसरकार ने ई-समुद्र नामक एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसका उद्देश्य समुद्री शासन में बदलाव लाना है।
ई-समुद्र के बारे में
- मंत्रालय: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय।
- यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो नाविकों (Seafarers), शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और अन्य समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के लिए विभिन्न सेवाओं को एकीकृत करता है।
- उद्देश्य: समुद्री शासन को डिजिटल बनाना, इसे अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना तथा भारत के समुद्री नाविक कार्यबल के कल्याण को बढ़ावा देना।
- भारत फिलीपींस के बाद विश्व में समुद्री नाविकों का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
- लाभ: समुद्री सेवाओं को सिंगल विंडो में लाकर शासन को आसान बनाता है, सेवा वितरण में सुधार करता है, अनुपालन संबंधी बोझ को कम करता है।
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1 sourceCSIR ने जयपुर में स्वदेशी रूप से विकसित ‘मॉडिफाइड मिक्स सील सरफेसिंग प्लस' (MSS+) तकनीक का प्रदर्शन किया।
MSS+ तकनीक के बारे में
- विकास: CSIR-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित।
- उद्देश्य: यह कम से मध्यम यातायात वाली सड़कों के निर्माण और रखरखाव की तकनीक है।
- वर्तमान स्थिति: उत्तर प्रदेश में 100 किलोमीटर से अधिक सड़कों पर इसका उपयोग किया जा चुका है।
- संघटन: कुचला हुआ प्राकृतिक पत्थर (एग्रीगेट), विशेष रूप से संशोधित बिटुमेन इमल्शन, खनिज मिश्रण
- लाभ:
- पर्यावरण अनुकूल: पारंपरिक गर्म मिश्रण डामर (asphalt) के विपरीत, MSS+ को सामान्य तापमान पर तैयार किया जाता है, इसलिए इसे पहले से गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
- कम लागत वाली तकनीक, अधिक संधारणीय, हर मौसम में उपयोगी। सड़क पर फिसलन प्रतिरोध बढ़ाती है।