सरकार द्वारा प्रस्तुत डेटा के अनुसार, NCAP के तहत 80% से अधिक शहर अभी भी निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) की सीमा से अधिक प्रदूषण स्तर दर्ज कर रहे हैं।
- दिल्ली, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, पुणे और गुवाहाटी जैसे शहरों में वर्ष 2023 से लगातार NAAQS की निर्धारित सीमा से अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया है।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के बारे में
- शुरुआत: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने वर्ष 2019 में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए NCAP की शुरुआत की।
- कवरेज: इसके तहत 24 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 130 शहर शामिल हैं। इनमें 122 नॉन-अटेनमेंट शहर और 8 दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर शामिल हैं।
- रणनीति: शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य-योजनाएं, प्रदर्शन आधारित वित्तपोषण, विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच समन्वय, जन आंदोलन के दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
- लक्ष्य: वर्ष 2025-26 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5) की सांद्रता में 40% तक कमी लाना या NAAQS के मानकों को प्राप्त करना।
- राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS:
- NAAQS को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने वर्ष 2009 में अधिसूचित किया था।
- ये मानक विभिन्न प्रदूषकों की वायुमंडलीय सांद्रता की अनुमत सीमा निर्धारित करते हैं।
- इसमें 12 प्रदूषक शामिल हैं, जिनमें PM10 और PM2.5 भी शामिल हैं।
- वार्षिक सीमा: PM10: 60 µg/m³ और PM2.5: 40 µg/m³
- प्राण/PRANA पोर्टल: NCAP के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए PRANA (पोर्टल फॉर रेगुलेशन ऑफ़ एयर पॉल्यूशन इन NAC) पोर्टल भी शुरू किया गया है।
शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अन्य पहलें:
- योजनाओं में समन्वय: स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U), अमृत, पीएम-ई-बस सेवा, पीएम ई-ड्राइव और नगर वन योजना जैसी योजनाएं एकीकृत की गई हैं।
- आपातकालीन उपाय:
- दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)
- स्थानीय प्रदूषण हॉटस्पॉट के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली
- प्रौद्योगिकी: प्राण पोर्टल, BS-VI उत्सर्जन मानक और सेंसर-सक्षम स्मार्ट पोल, जो वायु गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण में सहायता करते हैं।