डायर वुल्व्स (Direwolves) का पहला सफल डी-एक्सटिंक्शन किया गया | Current Affairs | Vision IAS
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कोलोसल बायोसाइंसेज नामक कंपनी ने दो प्राचीन डायर वुल्फ DNA नमूनों के आधार पर जीन-एडिटिंग और क्लोनिंग की तकनीक से तीन पिल्लों को जन्म देकर इस विलुप्त प्रजाति को दोबारा जीवित किया है।

  • पारंपरिक क्लोनिंग की बजाय, वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक कम आक्रामक विधि अपनाई, जिसमें ग्रे वुल्फ से एंडोथेलियल प्रोजेनिटर कोशिकाएं (EPC) ली गई। ग्रे वुल्फ डायर वुल्फ़ के सबसे करीबी जीवित रिश्तेदार हैं। 
  • इन कोशिकाओं को जीन एडिटिंग की मदद से डायर वुल्फ़ के DNA से मेल खाने वाला बनाया गया। इससे डायर वुल्फ़ का पहला सफल डी-एक्सटिंक्शन संभव हुआ। ध्यातव्य है कि डायर वुल्फ लगभग 10,000-13,000 साल पहले विलुप्त हो गए थे।
    • कोलोसल बायोसाइंसेज अब विलुप्त पिंक पिजन के डी-एक्सटिंक्शन पर भी काम कर रही है। इसके लिए पिंक पिजन के निषेचित अंडाणु में से प्राइमर्डियल जर्म सेल्स (PGCs) निकाले जा रहे हैं। पिंक पिजन मॉरीशस का स्थानिक जीव था। 
      • PGCs वे प्रारंभिक भ्रूणीय कोशिकाएं हैं, जो आगे चलकर शुक्राणु और अंडाणु के रूप में विकसित होती हैं। ये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आनुवंशिक और एपिजेनेटिक सूचना पहुंचाने का काम करती हैं।  

क्लोनिंग क्या है?

  • क्लोनिंग का अर्थ है किसी जीव की समान प्रति तैयार करना। क्लोनिंग के 2 प्रकार हैं:
    • रीप्रोडक्टिव क्लोनिंग: आनुवंशिक रूप से समान जीवों का जानबूझकर क्लोन तैयार करना। उदाहरण के लिए- इस विधि से तैयार पहली क्लोन डॉली नामक भेड़ (1996) थी।  
    • थेराप्यूटिक क्लोनिंग (भ्रूण क्लोनिंग): इसमें अनुसंधान उद्देश्यों के लिए भ्रूण की क्लोनिंग की जाती है।
  • प्रमुख तकनीके: सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT), एम्ब्रयो स्प्लिटिंग आदि।

क्लोनिंग से जुड़े नैतिक मुद्दे

  • जीवों का वस्तुकरण: सहमति के सिद्धांत के बिना जीवों का मानव उपयोग के लिए वस्तु की तरह इस्तेमाल करना।
  • जैव नैतिकता का उल्लंघन: क्लोनिंग को प्रजनन की प्राकृतिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए- 'वांछनीय' विशेषताओं वाले डिज़ाइनर बेबीज विकसित करना।
  • कांटियन एथिक्स: स्वयं में अंत और "दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा तुम चाहते हो कि तुम्हारे साथ किया जाए" के सिद्धांत क्लोनिंग को अनैतिक मानते हैं।
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