भारत और जापान समुद्री संबंधों को गहन करने पर सहमत हुए | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

भारत और जापान एक संधारणीय एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी भविष्य के लिए समुद्री संबंधों को गहन करने पर सहमत हुए हैं।

समुद्री सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • स्मार्ट आइलैंड्स: अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप को निम्नलिखित के माध्यम से ‘स्मार्ट आइलैंड्स’ में परिवर्तित किया जाएगा:
    • स्थायी प्रौद्योगिकियां (नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मोबिलिटी आदि);
    • आपदा-रोधी अवसंरचना; और
    • डिजिटल कनेक्टिविटी, इत्यादि। 
  • समुद्री सहयोग और निवेश: भारत जापान के जहाज निर्माण के अनुभव तथा बंदरगाहों और समुद्री औद्योगिक क्लस्टरों के सह-विकास से लाभ उठा सकता है।
    • भारत का लक्ष्य जापान के साथ 2027 तक 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हासिल करना है।
    • भारत आंध्र प्रदेश में इमाबारी शिपबिल्डिंग में ग्रीनफील्ड निवेश की भी योजना बना रहा है।
  • समुद्री विरासत और सांस्कृतिक सहयोग: भारत ने गुजरात के लोथल में प्रस्तावित राष्ट्रीय समुद्री विरासत संग्रहालय (NMHC) के विकास के लिए जापान से सहयोग की इच्छा प्रकट की है।
    • NMHC का उद्देश्य भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करना है। यह समुद्री क्षेत्रक में विरासत पर्यटन, शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक विश्व स्तरीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
  • मानव संसाधनों का कौशल विकास: भारत के लगभग 1.54 लाख प्रशिक्षित नाविक जापान के समुद्री कार्यबल के रूप में कार्य कर सकते हैं।

भारत-जापान समुद्री सहयोग का महत्त्व

  • व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण: ऊर्जा की कमी के कारण भारत और जापान समुद्री व्यापार पर बहुत अधिक निर्भर हैं। गौरतलब है कि भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 97% और जापान का लगभग पूरा व्यापार समुद्र पर आधारित है।
  • चीन का सामरिक प्रतिसंतुलन: दोनों देश हिंद महासागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर चिंतित हैं।
  • क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: भारत-जापान का समुद्री सहयोग निम्नलिखित क्षेत्रीय पहलों को भी मजबूती देता है जैसे:
    • क्वाड;
    • आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (SCRI);
    • एशिया-अफ्रीका विकास गलियारा (AAGC);
    • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA);
    • आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI);
    • उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (LeadIT) आदि। 
  • भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण का समर्थन: जापान, भारत की "एक्ट ईस्ट नीति", "मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030" और "समुद्री अमृत काल विज़न 2047" को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है।
Watch Video News Today
Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet