इस यात्रा के परिणामस्वरूप संयुक्त रणनीतिक विजन (2026-2030) और कई अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
यात्रा की मुख्य उपलब्धियां
- द्विपक्षीय संबंध के आधार को मजबूती: साझेदारी को निरंतर मार्गदर्शन देने के लिए वार्षिक नेतृत्व -स्तरीय बैठक को संस्थागत रूप दिया गया।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय: दक्षिण कोरिया 'हिंद-प्रशांत महासागर पहल' में शामिल हुआ। यह भारत द्वारा शुरू की गई गैर-संधि आधारित एक स्वैच्छिक व्यवस्था है।
- आर्थिक सहयोग: वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 54 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया।
- आर्थिक सुरक्षा वार्ता: इसे आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू की गई है।
- जलवायु के क्षेत्र में सहयोग: दक्षिण कोरिया अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल हुआ, जबकि भारत ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट (GGGI) में शामिल हुआ।
- GGGI के बारे में: इसका मुख्यालय सियोल (दक्षिण कोरिया) में है। यह संधि-आधारित अंतर्राष्ट्रीय और अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 2012 में रियो+20 सम्मेलन में हुई थी।
- जन-से-जन संपर्क: 2028-29 को 'भारत-कोरिया गणराज्य मित्रता वर्ष' के रूप में मनाया जाएगा।
- K-पॉप और बॉलीवुड के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'मुंबई कोरिया सेंटर' प्रारंभ किया जाएगा।
- समुद्री और जहाज निर्माण: जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में व्यापक साझेदारी की घोषणा की गई। इसके साथ ही VOYAGES (विजन फॉर ऑपरेशन ऑफ़ 'यार्ड असिस्टेड ग्रोथ विथ एफिशिएंसी एंड स्केल) दृष्टिकोण साझा किया गया।
- प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग: AI, सेमीकंडक्टर और IT क्षेत्रकों में सहयोग के लिए 'भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज' प्रारंभ किया गया।
भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों के बारे में
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