खीर भवानी मंदिर | Current Affairs | Vision IAS
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ज्येष्ठ अष्टमी पर प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला खीर भवानी उत्सवजम्मू और कश्मीर के गंदेरबल स्थित खीर भवानी मंदिर में मनाया जा रहा है।

खीर भवानी मंदिर के बारे में

  • अवस्थिति: श्रीनगर के निकट।
  • प्रमुख देवी: यह मंदिर देवी दुर्गा के एक रूप, देवी रागन्या को समर्पित है।
  • इसका निर्माण महाराजा प्रताप सिंह ने 1912 के आस-पास कराया था। बाद में महाराजा हरि सिंह ने मंदिर का अलंकरण और पुनर्निर्माण कराया।
  • मंदिर के केंद्र में एक षट्कोणीय झरना है, जो अपने पवित्र जल के लिए प्रसिद्ध है।
  • इस मंदिर और उत्सव का नाम 'खीर' नामक मिठाई पर रखा गया है, जो श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है।

हाल ही में इटली के सिसली द्वीप पर स्थित माउंट एटना ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ।

माउंट एटना के बारे में

  • यह भूमध्य सागर के द्वीपों में सबसे ऊँचा पर्वत है। यह दुनिया का सबसे सक्रिय स्ट्रैटोवोल्केनो है और यूरोप का सबसे बड़ा सक्रिय ज्वालामुखी भी है।
    • स्ट्रैटोवोल्केनो (मिश्रित ज्वालामुखी) बेसाल्ट की तुलना में उस लावा से बनते हैं जो ठंडा और चिपचिपा होता है, जिससे इनके विस्फोट अधिक प्रचंड होते हैं।
  • विशेषताएँ: शिखर क्रेटर, सिंडर कोन, लावा प्रवाह और वैले डे बोव अवसाद आदि।
  • यह ज्वालामुखी लगभग 2700 वर्षों के दर्ज इतिहास के साथ विश्व के सबसे पुराने प्रलेखित ज्वालामुखीय गतिविधियों में से एक है।
  • यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है।

एक अध्ययन के अनुसार, समुद्रों में आयरन  की अत्यधिक मात्रा से फाइटोप्लांकटन की अत्यधिक वृद्धि होती है। इस वजह से पोषक तत्वों की खपत की दर तेज हो जाती है और शीघ्र ही पोषक तत्वों की कमी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

फाइटोप्लांकटन के बारे में

  • ये सूक्ष्म जीव होते हैं जो खारे और मीठे दोनों तरह के पानी में पाए जाते हैं।
  • इनमें क्लोरोफिल होता है और इन्हें जीवित रहने व वृद्धि करने के लिए सूर्य का प्रकाश तथा आयरन, नाइट्रेट, फॉस्फेट, सल्फर जैसे अकार्बनिक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
  • प्रकार: बैक्टीरिया, प्रोटिस्ट, एकल-कोशिका वाले पौधे (सायनोबैक्टीरिया, डायटम, डाइनोफ्लैगलेट्स, हरे शैवाल, आदि)
  • महत्त्व:
    • खाद्य श्रृंखला: ये प्राथमिक उत्पादकों के रूप में कार्य करते हैं।
    • जैविक कार्बन पंप: वायुमंडल से महासागर की ओर कार्बन डाइऑक्साइड के स्थानांतरण का अधिकांश कार्य इन्हीं के द्वारा किया जाता है।
  • जोखिम: इनका अत्यधिक प्रसार हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन (जैसे रेड टाइड्स) का कारण बन सकता है, जिससे ऐसे विषैले पदार्थ निकल सकते हैं जो समुद्री और मानव जीवन दोनों के लिए खतरनाक हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) ने NAPDDR के तहत वंचित जिलों में जिला नशा मुक्ति केंद्र (DDACs) स्थापित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

NAPDDR के बारे में

  • उद्देश्य: नशे की लत की रोकथाम, नशा मुक्ति और पुनर्वास के माध्यम से मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की समस्या का समाधान करना।
  • योजना का प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना
  • मुख्य रणनीतियाँ:
    • नशे की लत की बुराइयों के बारे में शिक्षा और जागरूकता प्रदान करना,
    • नशा करने वालों का उपचार और साथ में पीड़ित व्यक्ति और उसके परिवार का पुनर्वास
    • विभिन्न स्तरों पर क्षमता निर्माण करना। 
  • वित्तीय सहायता निम्नलिखित को प्रदान की जाती है:
    • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को: जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए;
    • गैर सरकारी संगठन/स्वैच्छिक संगठन को निम्नलिखित के संचालन के लिए:
      • एकीकृत पुनर्वास केंद्र (IRCAs)
      • सामुदायिक साथियों द्वारा संचालित हस्तक्षेप (CPLI)
      • आउटरीच और ड्रॉप-इन केंद्र (ODIC)
      • जिला नशा-मुक्ति केंद्र (DDACs)
    • सरकारी अस्पताल को - व्यसन उपचार सुविधाएं (ATF) स्थापित करने के लिए
  • योजना की अवधि: 2018-2025 तक। 

हाल ही में "सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना" की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। 

  • इस बैठक में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से इस योजना पर विचार किया गया।

'सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' के बारे में:

  • कार्यान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय।
  • कार्यान्वयन एजेंसियां: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), नाबार्ड, भारतीय खाद्य निगम (FCI), केंद्रीय भंडारण निगम CWC) आदि।
  • योजना का महत्व:
    • खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा: विकेंद्रीकृत भंडारण से खाद्यान्न की बर्बादी कम होगी, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बढ़ेगी।
    • ऋण लेना आसान बनाना: किसान PACS में निर्मित गोदामों में अपनी उपज का भंडारण कर सकेंगे और इस भंडारित अनाज के बदले अगले फसल चक्र के लिए ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

इकोवास (ECOWAS) की 50वीं वर्षगांठ पर; संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक राजनयिकों ने इकोवास को अफ्रीका के क्षेत्रीय एकीकरण के मॉडल के रूप में सराहा

इकोवास (ECOWAS) के बारे में:

  • स्थापना: ECOWAS की स्थापना 1975 में हुई। 15 देशों ने लागोस संधि पर हस्ताक्षर करके इसकी शुरुआत की थी।
  • मुख्यालय: अबुजा (नाइजीरिया)।
  • सदस्य: बेनिन, काबो वर्डे, कोटे डी आइवर, गैम्बिया, घाना, गिनी, गिनी बिसाऊ, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सिएरा लियोन, सेनेगल और टोगो।
  • उद्देश्य: ECOWAS का मुख्य उद्देश्य पश्चिम अफ्रीका में आर्थिक संघ की स्थापना के लिए सहयोग और एकीकरण को बढ़ावा देना है, जिससे:
    • इसके लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो,
    • आर्थिक स्थिरता बनाए रखी जा सके,
    • सदस्य देशों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ किया जा सके, और
    • अफ्रीकी महाद्वीप की प्रगति और विकास में योगदान दिया जा सके।

सिंगापुर में वार्षिक शांगरी-ला डायलॉग आयोजित किया जा रहा है।

शांगरी-ला डायलॉग के बारे में

  • उद्भव: शीत युद्ध के बाद के बहुपक्षवाद और 9/11 की घटना के बाद विकसित हो रही रक्षा कूटनीति से प्रेरित होकर, इस संवाद या डायलॉग की स्थापना 2002 में हुई थी।
  • नामकरण: इस डायलॉग का नाम उस शांगरी-ला होटल के नाम पर रखा गया है जहाँ इसका पहला सम्मेलन आयोजित हुआ था।
  • आयोजक: इसे लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) द्वारा सिंगापुर सरकार के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
  • प्रारूप: यह “1.5 ट्रैक” आधारित बहुपक्षीय रक्षा संवाद है। इसमें सरकारी (आधिकारिक) और गैर-सरकारी (अनौपचारिक), दोनों प्रकार की भागीदारी देखी जाती है।
  • उद्देश्य: यह फोरम एशिया-प्रशांत, उत्तर अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व की सरकारों के मंत्रियों, रक्षा प्रमुखों और नीति निर्माताओं को क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने और नीतिगत क़दमों को साझा करने का अवसर प्रदान करता है।

सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 25 महिला कर्मियों के एक समूह को कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन के तहत तैनात किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन क्या है?

  • उद्भव: इसकी शुरुआत 1948 में मध्य-पूर्व में युद्ध विराम की निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम पर्यवेक्षण संगठन (UNTSO) की स्थापना के साथ हुई।
  • तीन मूलभूत सिद्धांत: पक्षकारों की सहमति, निष्पक्षता और बल का प्रयोग केवल आत्मरक्षा और मिशन के लक्ष्यों की रक्षा के लिए। 
  • शांति स्थापना के प्रमुख घटक: राजनीतिक प्रक्रियाओं की बहाली को सुगम बनाना, नागरिकों की सुरक्षा, चुनाव में सहायता करना, आदि। 
  • भारत की भूमिका: 1950 के दशक से, भारत ने 50 से अधिक शांति मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांति सैनिक भेजे हैं, जिससे वह संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा प्रयासों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।
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