भारत हिमनदीय झील के तटबंध टूटने से उत्पन्न बाढ़ों (GLOFs) के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है | Current Affairs | Vision IAS
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हिमालयी क्षेत्र में GLOFs के कारण गंभीर खतरे उत्पन्न होते हैं, जैसा कि नेपाल की लेंडे नदी में आई अचानक बाढ़ के रूप में देखा जा सकता है। इस संबंध में, प्रभावशाली जोखिम को कम करने और आपदा का सामना करने हेतु तैयार रहने के लिए सीमा-पार अग्रिम चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

हिमनदीय झील के तटबंध टूटने से उत्पन्न बाढ़ (GLOF) क्या हैं?

  • हिमनदीय झीलें: ये पिघलती हुई हिमनदियों (Glaciers) से एकत्रित होने वाले जल निकाय हैं। हिमनदियों से पिघलने वाली हिम का जल आमतौर पर हिमनदी के किनारे, सामने, भीतर, नीचे या सतह पर संचित होता है। 
  • GLOF: यह एक प्रकार की बाढ़ है। हिमनदीय झील के जल को रोक कर रखने वाले प्राकृतिक तटबंधों (जैसे कि हिमोढ़) के टूट जाने से अचानक और बहुत अधिक मात्रा में ढ़लान की दिशा में जल का प्रवाह होने लगता है।
    • उदाहरण के लिए: अक्टूबर 2023 में सिक्किम में दक्षिणी ल्होनक झील के टूटने से GLOF की घटना घटित हुई थी। 
  • भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) में 11 नदी घाटियां और 28,000 हिमनदीय झीलें (हिमनद के पिघलने से निर्मित जल निकायहैं। हिमनदीय झीलों के दो मुख्य प्रकार हैं:
    • सुप्राग्लेशियल झीलें: इनका निर्माण हिमनद की सतह पर मौजूद गड्ढे या गर्त में हिमनद के पिघले जल के जमा होने से होता है। इनका निर्माण अधिकतर गर्मियों के दौरान होता है, जब बर्फ के पिघलने की दर अधिक होती है।
    • हिमोढ़-तटबंध से निर्मित झीलें: ये हिमनद के अग्र भाग में असंगठित मलबे से बने अवरोध या तटबंध के पीछे हिमनद से पिघल कर आए जल के एकत्र होने से बनती हैं। ये तटबंध मजबूत नहीं होते, इसलिए इनके टूटने का खतरा बना रहता है।

IHR में GLOFs की घटना बढ़ने के कारण

  • GLOFs के लिए जिम्मेदार कारक:
    • GLOF की 2/3  घटनाएं हिमस्खलन या भूस्खलन के कारण होती हैं।
    • शेष GLOF घटनाएं असंगठित हिमोढ़ तटबंधों पर हिमनदों से पिघल कर आए अत्यधिक जल के दबाव के कारण उन तटबंधों के टूटने (2013 में चोराबाड़ी GLOF) और भूकंप के कारण होती हैं। 
  • बढ़ता तापमान और पिघलते हिमनद: 2023 और 2024 पृथ्वी पर सबसे गर्म वर्ष थे, जिसके कारण तापमान में वृद्धि हुई और हिमनदों के पिघलने में बढ़ोतरी हुई।
  • निगरानी से जुड़ी चुनौतियां: 7,500 हिमनदीय झीलें 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं। अतः ग्रीष्म ऋतु की छोटी अवधी में सभी का सर्वेक्षण करना कठिन हो जाता है।

भारत की GLOF जोखिम शमन रणनीति

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण समिति (CoDRR) के माध्यम से, केवल आपदा के बाद की कार्रवाई की बजाए जोखिम न्यूनीकरण को सुनिश्चित करने हेतु एक अग्रसक्रिय नजरिया अपनाया है।
  • राष्ट्रीय हिमनदीय झील के तटबंध टूटने से उत्पन्न बाढ़ जोखिम शमन परियोजना चार राज्यों अर्थात् अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड में कार्यान्वित की जा रही है।
  • केंद्रीय जल आयोग (CWC) अब उपग्रह इमेजरी के माध्यम से हिमालय में 902 हिमनदीय झीलों और जल निकायों की निगरानी करता है।।
  • सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) इमेजरी का बादल वाले मानसून के महीनों के दौरान भी हिमनदीय झील के आकार में परिवर्तन का स्वचालित रूप से पता लगाने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
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