भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) भारत की प्रमुख रक्षा इकाई के रूप में उभरा है।
- 2025 में इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच गई थी। हालांकि, इसी के साथ रैनसमवेयर, AI-संचालित घोटाले, फिशिंग और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी जैसे साइबर खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
- ऐसे में $20 बिलियन मूल्य वाले भारतीय साइबर सुरक्षा उद्योग की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण हो गई है। इसमें 400+ स्टार्ट-अप्स और 6.5 लाख पेशेवरों का कार्यबल शामिल है।
CERT-In के बारे में
- स्थापना: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के तहत 2004 में स्थापित। यह साइबर घटना के खिलाफ प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में कार्य करती है।
- मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
- अधिदेश (Mandate): साइबर घटनाओं का विश्लेषण करना; अलर्ट जारी करना; कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करना आदि।
CERT-In द्वारा शुरू की गई पहलें
- साइबर स्वच्छता केंद्र (CSK): यह बॉटनेट क्लीनिंग और मैलवेयर विश्लेषण केंद्र है। यह दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम्स का पता लगाने तथा उन्हें हटाने के लिए नि:शुल्क टूल्स प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC): यह खतरों का पता लगाने और वास्तविक समय में जानकारी साझा करने के लिए साइबर स्पेस मेटाडेटा को स्कैन करता है।
- कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (CSIRTs): CERT-In क्षेत्रक विशेष से संबंधित CSIRTs (जैसे- वित्तीय क्षेत्रक के लिए CSIRT-Fin और विद्युत क्षेत्रक के लिए CSIRT-Power) के साथ-साथ राज्य-स्तरीय CSIRTs के नेटवर्क की निगरानी करता है। इसका उद्देश्य विशेषीकृत घटनाओं के खिलाफ प्रतिक्रिया करना है।
- साइबर संकट प्रबंधन योजना (CCMP): यह सभी सरकारी निकायों के लिए एक रणनीतिक फ्रेमवर्क है। इसका उद्देश्य बड़े साइबर हमलों से निपटना और समन्वित रिकवरी सुनिश्चित करना है।
- सुरक्षा आश्वासन फ्रेमवर्क: यह एक कार्यक्रम है, जिसके तहत पैनल में शामिल लेखा-परीक्षक सरकारी एवं महत्वपूर्ण क्षेत्रकवार प्रणालियों का नियमित लेखा-परीक्षण और सुभेद्यता आकलन करते हैं।
साइबर अपराधों के खिलाफ अन्य संस्थागत ढांचे
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