पिछले सर्वेक्षण (2021–23) में भारत में अनुमानित 6,327 नदी डॉल्फिन दर्ज की गई थीं।
- वर्तमान सर्वेक्षण में गंगा और सिंधु नदी डॉल्फिन के अलावा, सुंदरवन एवं ओडिशा में पाई जाने वाली इरावदी डॉल्फिन को भी शामिल किया जाएगा।
डॉल्फिन परियोजना के बारे में
- शुरुआत: 15 अगस्त 2020 में।
- 'केंद्र प्रायोजित योजना: वन्यजीव पर्यावासों का विकास' के तहत एक योजना है।
- उद्देश्य: पर्यावास संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से समुद्री एवं नदी डॉल्फिन के साथ-साथ संबंधित सिटासियन (डॉल्फिन, व्हेल आदि) का भी संरक्षण करना।
नदी डॉल्फिन (सुपरफैमिली: प्लैटिनिस्टोइडे)
विशेषताएं:
- ये कार्यात्मक रूप से दृष्टिहीन होती हैं और आवागमन व शिकार के लिए इकोलोकेशन पर निर्भर करती हैं।
- इनका थूथन (snout) लंबा व पतला, पेट गोल, शरीर गठीला तथा फ्लिपर्स बड़े होते हैं।
- एक शीर्ष शिकारी के रूप में, वे नदियों के स्वास्थ्य की प्रमुख संकेतक प्रजाति हैं।
नदी डॉल्फिन के प्रकार
- गंगा नदी डॉल्फिन (पी. गैंगेटिका)
- यह भारत, नेपाल और बांग्लादेश की गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना व कर्णफुली-सांगु नदी प्रणालियों में पाई जाती है।
- इसे स्थानीय रूप से 'सुसु' कहा जाता है। यह भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN (एंडेंजर्ड) तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध।
- सिंधु नदी डॉल्फिन (पी. माइनर)
- यह सिंधु बेसिन (भारत में ब्यास नदी) में पाई जाती है।
- इसे स्थानीय रूप से 'भूलन' कहा जाता है। यह पंजाब का राज्य जलीय जीव है।
- संरक्षण स्थिति: IUCN (एंडेंजर्ड) तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध।
- इरावदी डॉल्फिन (ओर्केला ब्रेविरोस्ट्रिस)
- यह पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में समुद्री, लवणीय और ताजे जल के वातावरण में पाई जाती है।
- ये धीमी गति से तैरती हैं और मुख से पानी फेंकने (water spitting) का अनूठा व्यवहार प्रदर्शित करती हैं।
- संरक्षण स्थिति: IUCN (एंडेंजर्ड)।
डॉल्फिन संरक्षण के लिए शुरू की गई पहलें:
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