यह रिपोर्ट 2047 तक भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने के लिए एक परिवर्तनकारी रोडमैप प्रस्तुत करती है।
पहचानी गई प्रणालीगत चुनौतियां
- विखंडित वितरण: स्वास्थ्य प्रणाली विशिष्ट रोग-आधारित कार्यक्रमों में विभाजित है। प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल के बीच समन्वय की कमी है।
- वित्तीय कठिनाई: आयुष्मान भारत जैसी बीमा योजनाओं के बावजूद, इलाज पर स्वयं की जेब से होने वाला खर्च (OOPE) वित्तीय संकट का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। इसका मुख्य कारण ओपीडी चिकित्सा और दवाओं का खर्च है।
- गुणवत्ता में भिन्नता: 'जानने और करने' के बीच एक अंतर मौजूद है, जहां स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता अक्सर नैदानिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते हैं। इससे निम्न-स्तर की स्वास्थ्य देखभाल सेवा और स्वास्थ्य संबंधी खराब परिणाम उत्पन्न होते हैं।
- रोगों का बढ़ता बोझ: स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली संक्रामक रोगों के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते बोझ का भी सामना कर रही है।
लैंसेट आयोग द्वारा सुझाए गए सुधार
- नागरिकों को सशक्त बनाना: स्थानीय शासन और नागरिक समाज मंचों (जैसे- ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों) को मजबूत करना चाहिए। साथ ही, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र निर्मित करना चाहिए और स्वास्थ्य प्रणाली के प्रदर्शन के डेटा तक नागरिकों की पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।
- सार्वजनिक क्षेत्रक में सुधार: एकीकृत वितरण प्रणाली (IDS) को विकेंद्रीकृत करना चाहिए, जहां आधुनिक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल नेटवर्क को द्वितीयक स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल अस्पतालों से जोड़ा जाए। ये अस्पताल एक निश्चित आबादी की सेवा करेंगे।
- निजी क्षेत्रक को UHC लक्ष्यों के साथ जोड़ना: 'फी-फॉर-सर्विस' (प्रति सेवा शुल्क) मॉडल से हटकर 'कैपिटेशन' (प्रति व्यक्ति शुल्क) तथा वैश्विक बजट की ओर बढ़ना चाहिए। इससे बेहतर परिणामों और रोगों की रोकथाम को पुरस्कृत किया जा सकेगा। साथ ही, व्यापक देखभाल (ओपीडी + दवाओं) को कवर करने के लिए स्वैच्छिक बीमा को बढ़ावा देना चाहिए।
- कैपिटेशन' (प्रति व्यक्ति शुल्क): स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता को प्रति मरीज, प्रति समय (आमतौर पर प्रति माह या प्रति वर्ष) एक तय राशि दी जाती है, चाहे वह मरीज बीमार पड़े या न पड़े, या वह कितनी भी बार इलाज के लिए आए।
- अन्य सुझाव:
- तकनीक का विस्तार करना चाहिए (जैसे- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन);
- पारदर्शी शासन (जैसे- निगरानी के लिए रीयल-टाइम डेटा); और
- साक्ष्य-आधारित सुधारों के लिए शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को एक साथ जोड़ना चाहिए।