भारत में एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELVs) की चक्रीय अर्थव्यवस्था पर नीति आयोग की रिपोर्ट | Current Affairs | Vision IAS
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नीति आयोग ने "भारत में एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELVs) की चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का विस्तार" शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है।

  • एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELVs) ऐसे वाहन हैं जो:
    • वैध रूप से पंजीकृत नहीं हैं, 
    • किसी प्राधिकरण द्वारा अनुपयुक्त घोषित किए जा चुके हैं, या 
    • जिन्हें पंजीकृत वाहन मालिक द्वारा स्वेच्छा से अपशिष्ट घोषित कर दिया गया है।
  • भारत में ELVs की संख्या वर्ष 2025 में लगभग 23 मिलियन थी, जो 2030 तक दोगुना बढ़कर 50 मिलियन होने की संभावना है। 

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • ELVs की चक्रीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख चुनौतियां:
    • राज्यों में स्वचालित परीक्षण स्टेशनों (ATS) और पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (RVSF) से संबंधित अवसंरचनाओं की कमी।
    • पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं आर्थिक रूप से कम लाभकारी हैं क्योंकि इनमें अनौपचारिक क्षेत्र का वर्चस्व है।  
    • स्क्रैपिंग और पंजीकरण रद्द करने में प्रक्रियात्मक बाधाएं हैं।
    • उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता की कमी है।
  • मुख्य सिफारिशें
    • अवसंरचना विकास:
      • ‘एक जिले में एक स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ATS)' की स्थापना का लक्ष्य रखना।
      • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के नेतृत्व वाले RVSF मॉडल की संभावना तलाशना।
    • नीतिगत सुधार:  
      • अपशिष्ट वाहनों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण रद्द करना,
      • स्पेयर पार्ट्स प्रणाली को औपचारिक क्षेत्र का दर्जा देना,  
      • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को मजबूत करना ,
      • अनौपचारिक क्षेत्रक (जैसे कबाड़ी बाजार) को औपचारिक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना। 

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में 'गलवान' और 'नुब्रा' नामक दो बैक्ट्रियन ऊंटों ने पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च कर इतिहास रचा।

बैक्ट्रियन ऊँट के बारे में 

  • इसका नाम बैक्ट्रिया से पड़ा है, जो मध्य एशिया का एक प्राचीन क्षेत्र था। यह ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाला बड़ा, सम-खुर वाला जानवर (Even-toed ungulate) है।
  • पर्यावास: यह मूल रूप से मध्य एशिया के शुष्क और ठंडे क्षेत्रों में पाया जाता है। जैसे-गोबी और तकला मकान मरुस्थल में।
  • भारत में लगभग 300–400 बैक्ट्रियन ऊंट पाए जाते हैं। ये सभी लद्दाख की नुब्रा घाटी में प्राप्त होते हैं।
  • शारीरिक विशेषताएँ: इसकी पीठ पर दो कूबड़ होते हैं, जिनमें चर्बी (वसा) जमा रहती है।
  • जलवायु अनुकूलन: इसके शरीर पर सर्दियों में घने फर उग आते हैं। यह −30°C से 40°C तक के तापमान को सहन कर सकता है।
  • संरक्षण स्थिति: आईयूसीएन लाल सूची के अनुसार यह प्रजाति क्रिटिकली एंडेंजर्ड है।

एक हालिया अध्ययन में यह पाया गया है कि लोनार झील में असामान्य रूप से ताजे जल का अधिक प्रवाह हो रहा है। इससे इसकी पारिस्थितिकी को खतरा पैदा हो गया है।

  • संभावित कारण: अत्यधिक वर्षा और बोरवेलों की बढ़ती संख्या से अभेद्य बेसाल्टिक शैल की परतें टूट रही हैं। इससे ताजा जल खारे पानी की झील में मिल रहा है।

लोनार झील के बारे में

  • अवस्थिति: यह महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित खारे पानी की अनूप झील (lagoon) है।
  • विशिष्टता: यह पृथ्वी पर बेसाल्टिक शैल में स्थित एकमात्र ज्ञात ‘हाइपर वेलोसिटी इम्पैक्ट क्रेटर’ है। इसका पानी खारा और क्षारीय, दोनों है।
  • निर्माण: इसका निर्माण लगभग 52,000 साल पहले एक उल्कापिंड के टकराने से हुआ था।
  • संरक्षण स्थिति:
    • इसे 2020 में रामसर साइट घोषित किया गया था।
    • यह एक अधिसूचित राष्ट्रीय भू-विरासत स्मारक (National Geo-heritage Monument) है।

संयुक्त राज्य अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर होने की औपचारिकता पूरी कर ली है।  

  • गौरतलब है कि अमेरिका WHO का सबसे बड़ा दाता (डोनर) देश था।  

WHO के बारे में

  • मुख्यालय: जिनेवा (स्विट्जरलैंड) 
  • स्थापना: वर्ष 1948 में हुई। यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है।
  • अधिदेश (मैंडेट): 
    • वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियों के निर्माण का मार्गदर्शन करता है। 
    • स्वास्थ्य-देखभाल पर अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है। 
    • अंतरराष्ट्रीय लोक-स्वास्थ्य आपात स्थिति (PHEIC) घोषित करता है। 
  • शासी-व्यवस्था:
    • विश्व स्वास्थ्य सभा WHO में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। 
    • कार्यकारी बोर्ड: नीतियों को लागू करता है। 
    • सचिवालय: तकनीकी और प्रशासनिक कार्य करता है। इसका नेतृत्व महानिदेशक करते हैं। इसे क्षेत्रीय कार्यालयों से सहयोग मिलता है। 
  • सदस्य: WHO में 194 सदस्य देश हैं। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश इसमें शामिल हो सकते हैं। 
    • भारत इसका संस्थापक सदस्य है। 

हाल के वर्षों में, कुछ राज्यों में साल के पहले सत्र के प्रारंभ में राज्य विधानमंडल में राज्यपाल के संबोधन को लेकर विवाद देखे गए हैं।  

प्रासंगिक संवैधानिक अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 175: इसके तहत राज्यपाल को सदन (या सदनों) को किसी भी समय संबोधित करने या संदेश भेजने का अधिकार है। 
  • अनुच्छेद 176:  यह राज्यपाल को अनिवार्य रूप से विशेष अभिभाषण देने का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद 175 की तरह स्वैच्छिक नहीं बल्कि अनिवार्य है। यह अभिभाषण दिया जाता है:
    • प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र के प्रारंभ में, और
    • प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में।  
  • नबाम रेबिया बनाम उपाध्यक्ष (2016) वाद में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 175 या 176 के तहत संबोधन राज्यपाल द्वारा मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर किया जाना चाहिए। 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड (2026) के दौरान  लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन किया।  

LR-AShM के बारे में

  • यह भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है। इसे भारतीय नौसेना की 'कोस्टल बैटरी' (तटीय सुरक्षा) आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है।
  • इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर है। यह स्थिर और गतिमान, दोनों लक्ष्यों को भेद सकती है।
  • यह अपनी तरह की पहली मिसाइल है जो स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और उच्च सटीकता वाले सेंसर से युक्त है।
  • गति: यह एक क्वासी-बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती है। यह मैक 10 की अधिकतम गति प्राप्त कर सकती है। यह हवा में 'स्किपिंग प्रक्रिया' के माध्यम से औसत मैक 5 की गति बनाए रखती है।
  • प्रणोदन: यह द्वि-चरणीय ठोस प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है। दूसरे चरण के समाप्त होने के बाद बिना शक्ति (ईंधन) के ग्लाइड करते हुए आवश्यक दिशा परिवर्तन करती है।
  • स्टील्थ क्षमता: रडार से पकड़े जाने से बचने के लिए यह कम ऊंचाई पर और अत्यंत उच्च गति से उड़ान भरती है। इससे दुश्मन के लिए इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

नासा (NASA) के नए स्टार-हॉपर 'ExoMiner++' ने एक्सोप्लैनेट की खोज के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।  

ExoMiner++ के बारे में

  • परिचय: यह नासा द्वारा विकसित एक डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर है। इसे विशेष रूप से एक्सोप्लैनेट खोजने के लिए बनाया गया है।
  • डेटा स्रोत: यह मुख्य रूप से केपलर और TESS (ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट) मिशनों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करता है।
  • कार्यप्रणाली: यह तारों की लाइट कर्व (समय के साथ चमक में बदलाव) को स्कैन करता है। जब कोई ग्रह अपने तारे (सूर्य) के सामने से गुजरता है, तो तारे की चमक में हल्की कमी (ट्रांजिट) आती है। ExoMiner++ इसी कमी के संकेत से ग्रह की पहचान करता है
  • प्रमुख लाभ: यह सामान्य “ब्लैक बॉक्स” AI मॉडल जैसा नहीं है।  यह  व्याख्या करने योग्य AI (Explainable AI) है। 
    • यह पिंडों के बारे में खगोलविदों को संभाव्यता स्कोर देता है। यह भी बताता है कि किसी पिंड को ग्रह क्यों माना गया। इससे वैज्ञानिक खोज पर भरोसा बढ़ता है। 

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने जम्मू-कश्मीर के चतरगला दर्रे पर अधिक ऊंचाई वाले बचाव और सड़क-यातायात बहाली अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न किया।

चतरगला दर्रा  के बारे में

  • अवस्थिति: यह जम्मू-कश्मीर में लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी दर्रा है। यह डोडा जिले के भद्रवाह को कठुआ जिले के बसोहली से जोड़ता है। 
  • जम्मू-कश्मीर के अन्य प्रमुख दर्रे: खारदुंग ला, उमलिंग ला, जोजिला, आदि।

सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में

  • स्थापना: भारत सरकार द्वारा 1960 में इसकी स्थापना की गई थी।
  • मंत्रालय: 2015 से यह रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • उद्देश्य: नागरिक और सैन्य कर्मियों के मेलजोल के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत करना और सामरिक अवसरंचनाओं के निर्माण (जैसे सड़कें, सुरंगें, पुल आदि) को बढ़ावा देना। 
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अनौपचारिक क्षेत्र

अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा जिसमें विनियमित या सरकारी निगरानी के बिना असंगठित, छोटे पैमाने पर आर्थिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं। ELV क्षेत्र में, इसमें कबाड़ी बाजार और छोटे मरम्मत की दुकानें शामिल हो सकती हैं।

विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)

यह एक नीतिगत दृष्टिकोण है जो किसी उत्पाद के जीवनचक्र के अंत में उसके निपटान या पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी उत्पादकों पर डालता है। ELV के संदर्भ में, इसका अर्थ है कि वाहन निर्माता को अपने वाहनों के स्क्रैपिंग और पुनर्चक्रण की जिम्मेदारी लेनी होगी।

पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (RVSF)

ये सरकार द्वारा अनुमोदित सुविधाएं हैं जो एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से स्क्रैप (कबाड़) करने के लिए अधिकृत हैं। ये पुनर्चक्रण और खतरनाक पदार्थों के सुरक्षित निपटान को सुनिश्चित करती हैं।

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