केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) धोखाधड़ी के मामलों में 85% की वृद्धि दर्ज की गई | Current Affairs | Vision IAS
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2022-23 से, UPI से जुड़ी धोखाधड़ी के 2.7 मिलियन मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में कुल लगभग 2,100 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

  • UPI के यूजर्स की संख्या और कुल लेन-देन बढ़ने के साथ ही इससे जुड़ी धोखाधड़ी की संख्या भी बढ़ रही है।

डिजिटल या UPI लेन-देन और वित्तीय धोखाधड़ी की बढ़ती संख्या

  • वित्त वर्ष 2024 में, UPI के जरिए संख्या के मामले में 131.12 बिलियन लेन-देन किए गए जिनका कुल मूल्य 200 ट्रिलियन रुपये था। वर्तमान में, 400 मिलियन से अधिक यूनिक यूजर्स रियल टाइम पेमेंट के लिए UPI का उपयोग करते हैं।
  • RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 की तुलना में 2023-24 में वित्तीय धोखाधड़ी में 166% की वृद्धि दर्ज की गई है।

डिजिटल लेन-देन के समक्ष चुनौतियां

  • साइबर-सुरक्षा: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के अनुसार पिछले तीन वर्षों में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का आंकड़ा 1.25 लाख करोड़ रुपये का रहा है।
  • थर्ड पार्टी जोखिम: यह खतरा इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर एकाधिकार रखने वाले या डिजिटल बैंकिंग सॉल्यूशन्स प्रदान करने वालों से हो सकता है।
  • डिजिटल साक्षरता का अभाव: शहरों की 37.1% आबादी इंटरनेट का उपयोग करने में सक्षम है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात केवल 13% है। 
  • अन्य चुनौतियां: डिजिटल अवसरंचनाओं की कमी है, अलग-अलग डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के बीच समन्वय का अभाव है, आदि।

साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए पहलें

  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना: इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की घटनाओं से निपटना है। 
  • इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In): यह कंप्यूटर की सुरक्षा में सेंध लगने पर जवाबी कार्रवाई करने वाली भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
  • प्रधान मंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA): इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है।
  • साइबर स्वच्छता केंद्र: यह बॉटनेट संक्रमण का पता लगाकर एक सुरक्षित साइबर स्पेस बनाने पर केंद्रित है।

UPI से जुड़ी धोखाधड़ी के प्रकार

  • फिशिंग अटैक: यह धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका है। इसके तहत साइबर अटैकर यूजर्स को लुभाने के लिए फिशिंग ईमेल, मैसेज आदि भेजते हैं।
  • मैलवेयर अटैक: स्मार्टफ़ोन दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर की चपेट में आ जाते हैं। इससे UPI लेन-देन असुरक्षित हो जाता है।
  • सोशल इंजीनियरिंग फ्रॉड: इसके तहत धोखेबाज, यूजर्स के भरोसे का फायदा उठाते हैं, और संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने के लिए जल्दबाजी करते हैं या भय पैदा करते हैं।
  • विशिंग या वॉयस फिशिंग: धोखेबाज लोग कॉल के जरिये स्वयं को बैंक अधिकारी या UPI सेवा प्रदाता बताकर उपयोगी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं और फिर पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। 
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