कवच प्रणाली को अब 2,200 रूट किलोमीटर से अधिक पर लागू किया जा चुका है। इसने ट्रेन दुर्घटनाओं को तेजी से कम करने में मदद की है। जहां 2014-15 में 135 दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर 31 और 2025-26 में मात्र 11 रह गई है।
कवच के बारे में
- यह एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली है। यह ट्रेनों को सुरक्षित रखती है और टक्कर रोकने की क्षमता प्रदान करती है।
- विकासकर्ता: भारतीय रेलवे का अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO)।
- निरंतर सुधार: इसे 2020 में राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच संस्करण 4.0 को 2024 में मंजूरी मिली थी।
- वंदे भारत 4.0 में कवच 5.0 को शामिल करने की योजना बनाई गई है।

मुख्य सुरक्षा विशेषताएं:
- सिग्नल पासिंग ऐट डेंजर (SPAD) की पहचान और रोकथाम: यदि ट्रेन खतरे के सिग्नल (लाल सिग्नल) को पार करने वाली हो, तो यह उसे स्वचालित रूप से रोक देता है।
- कैब सिग्नलिंग: लोको पायलट को डिस्प्ले पर ही गति, सिग्नल की स्थिति और दूरी की जानकारी मिलती है।
- टक्कर निवारण: यह प्रणाली आमने-सामने, पीछे से और दाएं-बाएं से होने वाली सभी प्रकार की रेल टक्करों को रोकती है
- रियल-टाइम अपडेट: लोकोमोटिव (इंजन) को लगातार वास्तविक समय में अपडेट मिलता है।
- स्वचालित हॉर्न: लेवल क्रॉसिंग गेट (फाटकों) के निकट पहुंचने पर स्वचालित रूप से हॉर्न बजने लगता है।
- आपातकालीन SoS: संकट की स्थिति में 'स्टॉप-ऑन-साइट' (SoS) संदेश भेजती है।
- केंद्रीकृत निगरानी: नेटवर्क प्रबंधन प्रणाली (NMS) के माध्यम से ट्रेनों की आवाजाही की लाइव निगरानी की जाती है।
- कार्य सिद्धांत: यह प्रणाली सुरक्षित अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) रेडियो एंटीना और पटरियों पर लगे रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग का उपयोग करके ट्रैक-साइड प्रणालियों तथा इंजनों के बीच निरंतर संचार करती है।
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