पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड (REC) के निदेशक मंडलों ने विलय के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है।
पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) के बारे में
- स्थापना: 1986 में निगमित; यह महारत्न अनुसूची-A श्रेणी का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है।
- यह देश की एक बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है।
- 2010 में RBI द्वारा इसे अवसंरचना वित्तीय कंपनी (IFC) के रूप में वर्गीकृत किया गया।
- संबद्ध मंत्रालय: केंद्रीय विद्युत मंत्रालय।
ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड (REC) के बारे में
- स्थापना: 1969 में गंभीर सूखा और अकाल की पृष्ठभूमि में निगमित। इसकी स्थापना कृषि सिंचाई हेतु पंप-सेटों के विद्युतीकरण के लिए की गई थी।
- यह एक महारत्न कंपनी है। यह RBI के पास NBFC, लोक वित्तीय संस्था (PFI) और अवसंरचना वित्तीय कंपनी (IFC) के रूप में पंजीकृत है।
- संबद्ध मंत्रालय: केंद्रीय विद्युत मंत्रालय।
- यह “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” के लिए राष्ट्रीय परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी है।
केंद्र सरकार वर्ष 2026–27 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसमें बिल्ड-ओन-ट्रांसफर (BOT) मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी।
बिल्ड-ओन-ट्रांसफर (BOT) मॉडल के बारे में
- यह एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल है। इसमें कोई निजी संस्था परियोजना का वित्तपोषण, डिजाइन, निर्माण और संचालन एक निश्चित अवधि तक करती है। इसके बाद परियोजना सरकार को हस्तांतरित कर दी जाती है।
- राजस्व एवं उपयोगकर्ता शुल्क: निजी भागीदार को रियायत अवधि (concession period) के दौरान उपयोगकर्ता शुल्क/टोल वसूलने की अनुमति होती है, ताकि वह अपना निवेश वापस पा सके और लाभ कमा सके।
- जोखिम का दायित्व: इस मॉडल में निजी क्षेत्र पर जोखिम का भार अपेक्षाकृत अधिक होता है। इनमें यातायात कम होने का जोखिम, वित्तीय जोखिम तथा कुछ मामलों में लागत संबंधी जोखिम भी शामिल होता है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के तटों से दो उल्लेखनीय ‘बायो-वॉरियर’ समुद्री केंचुआ (पॉलीकीट्स) प्रजातियों की खोज की है।
- इन्हें ‘बायो-वॉरियर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये उन परिस्थितियों में भी जीवित रहती हैं जहाँ अन्य जीव नष्ट हो जाते हैं।
नई समुद्री केंचुआ प्रजातियों के बारे में
- नामालीकास्टिस सोलेनोटोग्नाथा (Namalycastis solenotognatha):
- इसका नाम इसके “नलिकाकार जबड़े” की संरचना के कारण रखा गया है।
- यह सल्फाइड-समृद्ध, दुर्गंधयुक्त पंक-मैदानों तथा सड़ती हुई मैंग्रोव लकड़ियों में प्राप्त होती है।
- यह अत्यंत विषम एवं प्रदूषित वातावरण में जीवित रहने के लिए अनुकूलित है।
- नेरीस धृतिया (Nereis dhritiae):
- इसका नाम ZSI की पहली महिला निदेशक धृति बनर्जी के सम्मान में रखा गया है।
- यह रेतीले समुद्र तटों पर लकड़ी के जेटी/डॉक के खंभों के अंदर पाई जाती है।
- यह उन क्षेत्रों में जीवित रहती है जो उच्च ज्वार के दौरान पानी में डूब जाते हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता के बीच ईरान ने चाबहार बंदरगाह और भारत के साथ सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
चाबहार बंदरगाह के बारे में

- अवस्थिति: ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित।
- शुरुआत: इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने 2018 में इस बंदरगाह का संचालन शुरू किया था।
- महत्व: यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ता है।
- 10-वर्षीय अनुबंध (2024): IPGL ने चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल के उपकरण प्रबंधन और संचालन के लिए ईरान के 'पत्तन और समुद्री संगठन' के साथ 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
- भारत ने बंदरगाह के लिए उपकरणों की खरीद हेतु 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अपनी वित्तीय सहायता की प्रतिबद्धता को पूरा कर दिया है।
हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने चिंता व्यक्त की है कि कई राज्य 'कार्यवाहक' पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति करके नियमित नियुक्तियों से बच रहे हैं। यह प्रक्रिया 2006 में प्रकाश सिंह वाद में दिए गए निर्णय का उल्लंघन है।
- इस निर्णय में DGP के लिए दो साल का निश्चित कार्यकाल निर्धारित किया गया था।
प्रकाश सिंह और अन्य बनाम भारत संघ वाद (2006) के बारे में
- DGP का चयन और कार्यकाल: DGP का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा तैयार किए गए वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल में से किया जाना चाहिए। इनका कम से कम दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल होना चाहिए।
- राज्य सुरक्षा आयोग (SSC): पुलिस के कामकाज में अनुचित राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए प्रत्येक राज्य को एक 'राज्य सुरक्षा आयोग' स्थापित करना होगा।
- जांच का पृथक्करण: अपराध की जांच शाखा को विधि और व्यवस्था शाखा के कर्तव्यों से अलग किया जाना चाहिए।
- पुलिस स्थापना बोर्ड (PEB): प्रत्येक राज्य में DGP की अध्यक्षता में एक पुलिस स्थापना बोर्ड का गठन होना चाहिए। यह बोर्ड डीएसपी स्तर तक के पुलिस अधिकारियों के तबादलों, नियुक्तियों और पदोन्नति का निर्णय ले सकेगा।
- पुलिस शिकायत प्राधिकरण: पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए गंभीर कदाचार, शक्ति के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच के लिए इसका गठन किया जाना चाहिए।
- राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग: केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों के चयन और नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक राष्ट्रीय आयोग की स्थापना की जानी चाहिए।
भारत ने ओडिशा के समन्वित परीक्षण केंद्र से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-III का सफल परीक्षण किया।
अग्नि-III के बारे में
- विकसितकर्ता: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
- विशेषताएँ: यह दो चरणों वाली और ठोस ईंधन से चालित बैलिस्टिक मिसाइल है।
- मारक क्षमता (रेंज): 3000 किमी से अधिक
- वारहेड्स: यह पारंपरिक और परमाणु, दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है।
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में मोल्टबुक (Moltbook) से जुड़े सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर किया गया है।
मोल्टबुक के बारे में
- अवधारणा: यह स्वायत्त AI एजेंट्स के लिए एक विशेष सोशल फोरम है। यह रेडिट जैसे ऑनलाइन मंच के समान है।
- यहाँ मनुष्य केवल दर्शक (Observer) हो सकते हैं, जबकि पोस्ट करने, बहस करने और अपवोट करने का काम केवल AI एजेंट करते हैं।
- मोल्टबुक पर मौजूद कई एजेंट ओपन-सोर्स AI एजेंट OpenClaw का उपयोग करके बनाए गए हैं।
- शुरुआत: जनवरी 2026 में मैट श्लिच द्वारा।
- उपयोग: डेवलपर्स इसका उपयोग AI एजेंट्स की स्वायत्तता, आपसी समन्वय और मशीनों के सामाजिक व्यवहार को परखने के लिए कर सकते हैं।
- डेवलपर्स इसका उपयोग यह देखने के लिए करते हैं कि AI एजेंट कैसे स्वायत्त रूप से समन्वय और सामाजिक व्यवहार करते हैं।
- उदाहरण के लिए, एजेंटों ने यहाँ 'क्रस्टाफेरिएनिज्म' (Crustafarianism) नामक एक कृत्रिम धर्म तक बना लिया है।
केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने eसांख्यिकी पोर्टल के लिए मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल (MCP) सर्वर का बीटा संस्करण शुरू किया।
- मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल तकनीक उपयोगकर्ताओं को अपने AI टूल्स और एप्लिकेशनों के माध्यम से डेटा-सेट्स से सीधे जुड़ने की सुविधा देती है।
eसांख्यिकी पोर्टल के बारे में
- यह केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा शुरू किया गया एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका उद्देश्य भारत के आधिकारिक सांख्यिकी आंकड़ों तक सुगम और एकीकृत पहुंच प्रदान करना है।
- इसका लक्ष्य नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम जनता को समय पर और उपयोगी डेटा इनपुट उपलब्ध कराना है।
- इसमें शामिल प्रमुख डेटा-सेट्स हैं: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, आदि।