रैट-होल खनन में इंजीनियरिंग आधारित छत और दीवारों की सुरक्षा न होने के कारण इन सुरंगों के ढहने का खतरा हमेशा बना रहता है।
रैट-होल माइनिंग क्या है?
- रैट-होल खनन कोयला निकालने का एक आदिम (पुराना) और अवैज्ञानिक तरीका है।
- इस प्रक्रिया में सबसे पहले जमीन की वनस्पतियों को हटाकर सफाई की जाती है, और फिर कोयले की परत (coal seam) तक पहुंचने के लिए जमीन में गहरी संकरी सुरंगें बनाई जाती हैं।
- पहाड़ियों की ढलानों को खोदकर कोयले की परत तक पहुंचा जाता है। इसके बाद एक क्षैतिज सुरंग (horizontal tunnel) बनाई जाती है, जिसके जरिए मजदूर अंदर घुसते हैं और कोयला निकालते हैं।
- निकालने की विधियाँ: साइड-कटिंग (Side-cutting) और बॉक्स-कटिंग (Box-cutting)।
अवैध खनन जारी रहने के लिए उत्तरदायी कारक
- प्राकृतिक कारक: मेघालय में कोयले की परतें बहुत पतली हैं। इस कारण वहां 'ओपनकास्ट माइनिंग' (खुले खनन) की तुलना में रैट-होल खनन आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक लगती है।
- विकल्पों की कमी: बागवानी, निर्माण या विनिर्माण जैसे क्षेत्रकों में ठोस आर्थिक विकल्पों का अभाव है। इस कारण स्थानीय आबादी अपनी जीविका के लिए फिर से खनन की ओर रुख करती है।
- जटिल स्वामित्व संरचनाएं: मेघालय का पारिस्थितिकी-तंत्र अनूठा है। यहां भूमि छोटे स्तर पर निजी या सामुदायिक स्वामित्व वाली व खंडित है।
अवैध रैट-होल खनन को रोकने के उपाय
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