कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब एक व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली आर्थिक तकनीक बन गई है। यह सभी आर्थिक क्षेत्रकों में नियोजनीयता (Employability) को नए सिरे से परिभाषित कर रही है।
AI नियोजनीयता को कैसे पुनर्परिभाषित कर रहा है?
- नौकरियों का प्रतिस्थापन: AI उन नौकरियों की जगह ले रहा है, जिनमें पूर्वानुमानित और नियम-आधारित कार्य शामिल हैं (जैसे: असेंबली लाइन, ग्राहक सेवा चैटबॉट, लेखाकार/अकाउंटेंट, प्रशासनिक सहायक आदि)।
- नए रोजगार के अवसर: प्रौद्योगिकी-उन्मुख क्षेत्रों में नए अवसर उभर रहे हैं, जैसे डेटा वैज्ञानिक, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, और विशिष्ट बाजार समाधान आदि।
- गुणात्मक बदलाव: विशेष रूप से तेजी से बढ़ते तकनीकी क्षेत्रों में भर्ती अब कौशल-आधारित होती जा रही है। विश्व बैंक के अनुसार, AI-केंद्रित भूमिकाओं में वेतन में 28% तक की वृद्धि देखी जा रही है।
- श्रम उत्पादकता में सुधार: जेनेरेटिव AI के पूर्ण रूप से अपनाए जाने से श्रम उत्पादकता के स्तर में लगभग 15% की वृद्धि होगी, जो बेरोजगारी दर में बदलाव का कारण बन सकती है।
अनुकूलन के लिए रणनीतियां
- कौशल प्रसार पर ध्यान: संक्षिप्त और मॉड्यूल-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से लक्षित कौशल प्राप्ति।
- शैक्षिक सुधार: स्थिर ज्ञान से हटकर आजीवन सीखने को बढ़ावा देना। पाठ्यक्रम में अनुकूलनशीलता और जटिल समस्या समाधान पर जोर देना।
- सहयोगात्मक दृष्टिकोण: नागरिक कल्याण के साथ AI अपनाने के तालमेल के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षकों को शामिल करते हुए एक स्पष्ट राष्ट्रीय प्रतिबद्धता।
- लोकतांत्रिककरण (Democratization): नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) को कौशल बढ़ाने में सहायता करें और डिजिटल विभाजन को रोकने के लिए प्रमाणन (certification) तक पहुंच सुनिश्चित करें।
- नैतिक विचार (Ethical Considerations): रोजगार प्रथाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता केंद्रीय होनी चाहिए।
AI अपनाने के लिए प्रमुख पहल
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