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तटीय सुरक्षा योजना (COASTAL SECURITY SCHEME)

05 Mar 2025
27 min

सुर्ख़ियों में क्यों? 

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तटीय सुरक्षा योजना (CSS) के कार्यान्वयन की समीक्षा के दौरान इसमें मौजूद कई कमियों को रेखांकित किया है।

तटीय सुरक्षा योजना (COASTAL SECURITY SCHEME: CSS) के बारे में

  • यह योजना केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 2005 में तैयार की थी।
  • उद्देश्य: तटीय क्षेत्रों, विशेषकर तट के निकट उथले पानी में गश्त लगाने और निगरानी करने के लिए तटीय पुलिस की अवसंरचना को मजबूत करना।
  • योजना के चरण
    • चरण-I (2005-2011): तटीय राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अनुमानित आवश्यकताओं के आधार पर अवसंरचना स्थापित करना।
      • सरकार ने सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 73 तटीय पुलिस स्टेशन (Coastal Police Stations: CPS), 97 चेक पोस्ट, 58 चौकियां और 30 ऑपरेशनल बैरक स्थापित करने में सहायता प्रदान की है।
    • चरण- II (2011-2020): तटीय राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा खतरों/ कमियों के विश्लेषण के आधार पर तटीय सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त आवश्यकताओं का अनुमान लगाया गया।
    • चरण-III: वर्तमान में केंद्र सरकार इस चरण की प्रक्रिया तैयार कर रही है।

भारत में तटीय सुरक्षा तंत्र के समक्ष चुनौतियां

  • स्थलाकृति और भौगोलिक अवस्थिति: भारत की तटरेखा 7,516 किलोमीटर लंबी है। इनमें कई नदीमुख (क्रीक) और नदिकाएँ (रीवूलेट्स) शामिल हैं। ये चोरी-छिपे भारत में घुसपैठ और समुद्री मार्ग से आतंकवादियों का भारत में प्रवेश आसान बनाती हैं।
    • उदाहरण के लिए- गुजरात के कच्छ जिले में सर क्रीक क्षेत्र में हरामी नाला (Harami Nala) भारत से निकलता है और पाकिस्तान में प्रवेश करता है। घुसपैठियों और तस्करों द्वारा इस मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है।
  • भारतीय तटरक्षक बल (ICG) में कार्यबल की कमी: भर्ती  में देरी और चयन की कठिन प्रक्रिया के कारण कार्यबल की कमी बनी हुई है। इसके अलावा, कार्यबल में ऑपरेशनल क्षमता की भी कमी देखी गई है। 
  • प्रशिक्षण की कमी: तटीय गश्त और समुद्री युद्ध अभियानों में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी से मरीन पुलिस और सीमा शुल्क विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
  • अवसंरचना की कमी: उदाहरण के लिए, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे तटीय राज्यों में अधिक कार्यालयों, हथियारों, नावों और जहाजों की कमी के कारण तटीय सुरक्षा प्रभावित होती है।
    • नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने संसद में प्रस्तुत एक रिपोर्ट में कहा कि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद गठित तटीय सुरक्षा बल के पास अभी भी पूर्ण अवसंरचना उपलब्ध नहीं है।
  • व्यवस्था में खामियां: तटीय  एजेंसियों के बीच और इनका राज्य एजेंसियों के साथ अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद और समन्वय की कमी तथा, कानून एवं प्रक्रियाओं का नहीं होना, सरकारी उदासीनता जैसी खामियां मौजूद हैं।
  • मछुआरों के नौकाओं की निगरानी: भारतीय जलक्षेत्र में 300,000 से अधिक पंजीकृत मछुआरे सक्रिय हैं। ऐसे में मछली पकड़ने वाली पंजीकृत नौकाओं और अवैध गतिविधियों में संलिप्त नौकाओं के बीच अंतर कर पाना बड़ी चुनौती साबित होती है।
    • उदाहरण के लिए- मुंबई में 1993 में हुए लगातार बम धमाकों में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों को मछुआरों की नौकाओं से महाराष्ट्र के रायगढ़ तट पर लाया गया था।

तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शुरू की गई अन्य पहलें

  • समुद्री सुरक्षा का आधुनिकीकरण: भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों (नौसेना, तटरक्षक बल और मरीन पुलिस) की क्षमता में वृद्धि की जा रही है और नए उपकरणों (जहाजों, पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों, रडार और सैटेलाइट्स) से लैस किया जा रहा है।
    • उदाहरण के लिए, अंडमान और निकोबार कमान भारत की तीनों रक्षा-सेनाओं (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) की संयुक्त कमान है, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल की थिएटर कमान भी शामिल है।
    • प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत, भारतीय नौसेना ने गोवा के समीप कारवार में आईएनएस कदंब (INS Kadamba) नौसैनिक अड्डे की स्थापना की।
  • तकनीकी सर्विलांस सिस्टम: तटीय निगरानी नेटवर्क, राष्ट्रीय कमान नियंत्रण संचार और खुफिया नेटवर्क (National Command Control Communication and Intelligence Network: NC3I) और राष्ट्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता परियोजना जैसी परियोजनाएं समुद्री क्षेत्र की समग्र और एकीकृत निगरानी प्रदान करने के लिए तैयार की गई हैं।
    • उदाहरण के लिए- NC3I की स्थापना द्वीपीय क्षेत्रों सहित देश के समुद्र तट पर स्थित नौसेना और तटरक्षक बल और अधीनस्थ एजेंसियों के परिचालन केंद्रों को जोड़ने के लिए की गई है।
  • सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल: उदाहरण के लिए- समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय समिति, राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक, संयुक्त संचालन केंद्र और तटीय सुरक्षा संचालन केंद्र जैसी संस्थाएं अलग-अलग एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र रूप से कार्य करने की प्रवृत्ति को दूर करके एक-दूसरे के समन्वय में कार्य करने में मदद करती हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
    • क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (SAGAR/ सागर) पहल क्षेत्रीय सहयोग, आर्थिक विकास और सुरक्षित समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देती है।
    • हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (Indian Ocean Naval Symposium: IONS) और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) जैसे फ़ोरम्स संवाद, सहयोग और साझा समुद्री-चुनौतियों के समाधान के लिए समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देते हैं।

 

निष्कर्ष 

तटीय सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए सरकार को मौजूदा तटीय सुरक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों को दूर करना होगा। समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुरक्षा पहलों को जारी रखने, नए कर्मियों की भर्ती करने और भारतीय तटरक्षक बल (ICG), भारतीय नौसेना और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, निगरानी और सतर्कता के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सकता है तथा कर्मियों के प्रशिक्षण के स्तर और गुणवत्ता को भी मजबूत किया जा सकता है।

 

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