सुर्खियों में क्यों?
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 'लिगो-इंडिया' सुविधा के निर्माण हेतु परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) का अनुबंध प्राप्त किया है।
लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) के विषय में

- LIGO विश्व की सबसे बड़ी गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला है, जो लेजर व्यतिकरणमिति (इंटरफेरोमेट्री) का उपयोग करके दिक्-काल में उत्पन्न होने वाली तरंगों का पता लगाती है।
- गुरुत्वीय तरंगें दिक्-काल में उत्पन्न वे 'तरंगें' हैं जो ब्रह्मांड की कुछ सबसे हिंसक और अत्यधिक ऊर्जावान प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होती हैं।
- अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1916 में अपने 'सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत' के परिणामस्वरूप इनकी भविष्यवाणी की थी।
- ये प्रकाश की गति (लगभग 186,000 मील प्रति सेकंड) से यात्रा करती हैं।
- जब ये तरंगें गुजरती हैं, तो ये अपने मार्ग में आने वाली किसी भी वस्तु/पिंड को संकुचित और विस्तारित कर देती हैं।
- प्रत्येक भौतिक वस्तु जो त्वरित होती है, वह गुरुत्वीय तरंगें उत्पन्न करती है।
- हालांकि, पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं का द्रव्यमान और त्वरण इतना कम होता है कि उनसे उत्पन्न गुरुत्वीय तरंगें इतनी बड़ी नहीं होती कि उनका पता लगाया जा सके।
- पहचाने जाने योग्य गुरुत्वीय तरंगें उत्पन्न करने वाली घटनाओं के कुछ उदाहरण:
- जब किसी तारे में असममित रूप से विस्फोट होता है (जिसे सुपरनोवा कहा जाता है)।
- जब दो बड़े तारे एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं।
- जब दो ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं और आपस में विलीन हो जाते हैं।
- जब दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं। (LIGO डिटेक्टरों द्वारा 2017 में GW170817 तरंग का इसी प्रकार पता लगाया गया था)
- वित्तपोषण एवं संचालन: यह 'नेशनल साइंस फाउंडेशन' (USA) द्वारा समर्थित है तथा 'कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान' (Caltech) और 'मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान' (MIT) द्वारा संचालित की जाती है।
- प्रौद्योगिकी: दिक्-काल में होने वाली अत्यंत सूक्ष्म विकृतियों को मापने के लिए इसमें L-आकार में व्यवस्थित दो 4-किलोमीटर लंबी भुजाओं वाले लेजर इंटरफेरोमीटर का उपयोग किया जाता है।
- डिटेक्टर: अमेरिका में लगभग 3000 किलोमीटर की दूरी पर दो मुख्य वेधशालाएं अवस्थित हैं। ये हैं – हैनफोर्ड (वाशिंगटन) और लिविंगस्टन (लुइसियाना) में अवस्थिति हैं।
- वैश्विक नेटवर्क: यह इटली के 'वर्गो डिटेक्टर', जापान के 'कगरा' (KAGRA) और जर्मनी के 'GEO600' जैसे अन्य डिटेक्टरों के साथ मिलकर कार्य करता है।
- नोबेल पुरस्कार (2017): रेनर वीस, बैरी सी. बैरिश, और किप थॉर्न को 'LIGO-VIRGO परियोजना' में उनके योगदान और गुरुत्वीय तरंगों की खोज (2015) के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था।
लिगो-इंडिया (LIGO-India)
- इंडिगो (InDIGO - गुरुत्वीय-तरंग अवलोकनों में भारतीय पहल): यह गुरुत्वीय-तरंग खगोल विज्ञान में एक बहु-संस्थागत भारतीय राष्ट्रीय परियोजना के लिए उन्नत प्रायोगिक सुविधाएं स्थापित करने की पहल है। (लिगो-इंडिया की स्थापना के लिए भागीदारी)।
- प्रकृति (Nature): लिगो-इंडिया, भारत में एक नियोजित गुरुत्वीय-तरंग वेधशाला है जो गुरुत्वीय तरंगों का अध्ययन करने वाले डिटेक्टरों के वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा बनेगी।
- अवस्थिति: औंध, हिंगोली जिला, महाराष्ट्र।
- कार्यान्वयन: परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा नेशनल साइंस फाउंडेशन (USA) के सहयोग से कार्यान्वयन किया जा रहा है।
- उद्देश्य: विश्व स्तर पर वितरित डिटेक्टर नेटवर्क के माध्यम से आकाश में गुरुत्वीय-तरंग स्रोतों की पहचान की सटीकता और उनके स्थानीयकरण में सुधार करना।
- भारत के लिए महत्त्व: खगोल भौतिकी अनुसंधान नेतृत्व का विकास; तकनीकी उन्नति; औद्योगिक सहयोग; अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कूटनीति आदि।