सुर्ख़ियों में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में आर्थिक विकास के एक प्रमुख आधार के रूप में व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) को और अधिक महत्व दिया गया है। (इन्फोग्राफिक्स देखें)
व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) के बारे में
- यह किसी देश के नियमों और संस्थागत ढांचे की गुणवत्ता को दर्शाता है, जिससे यह निर्धारित होता है कि व्यवसाय को प्रारंभ करना, संचालित करना, नियमों का पालन करना और उसे बंद करना कितना सरल है।

- भारत में EoDB की स्थिति:
- विश्व में स्थान: विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत 63वें स्थान पर था। इसकी रैंक में विगत 5 वर्षों में 79 स्थानों का सुधार हुआ है।
- व्यवसाय पंजीकरण में वृद्धि: पिछले 5 वर्षों (2020–21 से 2025–26) में लगभग 27% वृद्धि हुई है।
EoDB का महत्व
- निवेश और वैश्विक व्यापार के अवसर आकर्षित करना: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी स्पष्ट और स्थिर नीतियों ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ने में सहायता की है, जिससे देश इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है।
- लघु उद्योगों (MSMEs) की सहायता: नियमों को सरल बनाने से MSMEs के लिए अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं।
- उद्यम पंजीकरण और व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली (TReDS) जैसे प्लेटफॉर्म उन्हें आधिकारिक पहचान दिलाने के साथ-साथ नकदी प्रवाह तक शीघ्र पहुंच प्रदान करते हैं।
- सुशासन: फेसलेस कर मूल्यांकन और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम मानव विवेकाधिकार आधारित हस्तक्षेप को समाप्त करते हैं, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आती है।
- रोजगार सृजन: व्यवसाय प्रारंभ करने में बाधाओं को कम करने से (जैसे- स्टार्ट-अप इंडिया के माध्यम से) नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलता है और भारत की बड़ी युवा आबादी के लिए रोजगार सृजन में सहायता मिलती है।
- दक्षता और नवाचार को बढ़ावा: पीएम गति शक्ति जैसी मास्टर योजनाओं के माध्यम से लॉजिस्टिक्स और लेन-देन लागत कम होती है। इसलिए कंपनियां अनुपालन प्रबंधन से पूंजी हटाकर अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश कर सकती हैं।
EoDB से संबंधित चुनौतियां
- धीमी न्यायिक प्रणाली: 4.6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के कारण लगभग ₹25 लाख करोड़ की बड़ी राशि वाणिज्यिक विवादों में फंसी हुई है, जिसके कारण दीर्घकालिक निवेशक चिंतित रहते हैं।
- बड़े निगमों के पक्ष में असंतुलन: व्यवसाय करने में सुगमता के हालिया सुधारों का लाभ मुख्यतः बड़े निगमों को मिला है, क्योंकि वे GST अनुपालन, ई-इन्वॉयसिंग जैसी नई प्रणालियों को अपनाने में सक्षम हैं।
- कार्यान्वयन में असमानता: जहां उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों ने व्यावसायिक सुधारों को पूर्ण रूप से अपनाया है, वहीं अन्य राज्य पीछे हैं, जिसके कारण विदेशी निवेश मुख्यतः कुछ अग्रणी राज्यों तक सीमित रह जाता है।
- भूमि और श्रम संबंधी बाधाएं: भूमि एक जटिल राज्य विषय बनी हुई है, जहां स्पष्ट और डिजिटाइज्ड अभिलेखों का अभाव है।
- इसके अतिरिक्त, कार्यबल में औपचारिक कौशल की अत्यधिक कमी के कारण पूंजी-गहन विकास और श्रम-प्रधान विनिर्माण की आवश्यकताओं के बीच असंतुलन उत्पन्न होता है।
व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) को समर्थन देने वाले अन्य सुधार
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आगे की राह
- न्यायिक दक्षता एवं ADR का मुख्यधारा में समावेशन: जिला स्तर पर विशेष वाणिज्यिक न्यायालयों की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि विवाद समाधान की अवधि जो वर्तमान में लगभग 1,400 दिन है से घटाकर वैश्विक औसत 400 दिनों तक हो सके।
- विवादों के निपटान से पहले वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को अनिवार्य बनाने से मामलों की लंबित संख्या कम होगी तथा अनुबंध प्रवर्तन की लागत भी घटेगी।
- D-BRAP के माध्यम से स्थानीयकरण: सुधारों का केंद्र राज्य की राजधानियों से हटाकर नगरपालिकाओं तक लाया जाए, इसके लिए जिला व्यापार सुधार कार्य योजना (D-BRAP) को लागू किया जाए।
- शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को निर्माण अनुमति एवं उपयोगिता सेवाओं के कनेक्शन को सुचारू रूप से प्रदान करने हेतु डिजिटल अवसंरचना से सुसज्जित किया जाना चाहिए।
- U-PIN के माध्यम से भूमि सुधार: विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (U-PIN) को देशभर में शीघ्र लागू किया जाए, जो "भूमि का आधार" के रूप में कार्य करेगा। इससे विवाद-मुक्त डिजिटल भूमि अभिलेख तैयार होंगे और औद्योगिक भूमि अधिग्रहण में जोखिम कम होगा।
- विश्वास आधारित शासन व्यवस्था : छोटी प्रशासनिक त्रुटियों को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यवसायों को कारावास के भय से मुक्त किया जाना चाहिए।
- सूक्ष्म उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणन प्रणाली अपनाई जाए, जिससे यादृच्छिक एवं जोखिम-आधारित निरीक्षण किए जाएं।
- ESG एवं B-READY मानकों के साथ समन्वय: विश्व बैंक के आगामी B-READY सूचकांक में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए भारत को पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को अपनाना होगा। साथ ही, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का उपयोग कर पूर्णतः कागजरहित अनुपालन प्रणाली विकसित करनी होगी।
निष्कर्ष
व्यवसाय करने की सुगमता को केवल एक सूचकांक न मानकर, इसे राज्य की क्षमता सुधार के रूप में देखना चाहिए, जो निवेश, उद्यम विकास, निर्यात प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन को प्रभावित करता है।
भारत के संदर्भ में बेहतर EoDB से औपचारिकरण को बढ़ावा मिलेगा, MSMEs की स्थिरता में सुधार होगा, नागरिक और राज्य के बीच घर्षण कम होगा तथा विकास अधिक व्यापक और संतुलित बनेगा। इसकी वास्तविक सफलता केवल रैंकिंग सुधार में नहीं, बल्कि एक ऐसे पूर्वानुमेय, पारदर्शी और स्थानीय रूप से सक्षम तंत्र के निर्माण में निहित है, जहां उद्यमिता को बढ़ावा मिले और साथ ही श्रम कल्याण एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी से समझौता न हो।
