भारत में व्यवसाय करने की सुगमता (Ease of Doing Business in India) | Current Affairs | Vision IAS

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भारत में व्यवसाय करने की सुगमता (Ease of Doing Business in India)

31 Mar 2026
1 min

In Summary

  • व्यापार करने में आसानी (ईओडीबी) सुगम व्यावसायिक संचालन के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करती है, जिससे निवेश आकर्षित होता है और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
  • विश्व बैंक समूह की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2019 में भारत 63वें स्थान पर रहा और उद्यम और टी-रीडीएस जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से व्यवसाय पंजीकरण और एमएसएमई के लिए समर्थन में सुधार दिखाया।
  • चुनौतियों में धीमी कानूनी प्रणाली, राज्यों के बीच कार्यान्वयन में भिन्नता और भूमि/श्रम संबंधी अड़चनें शामिल हैं, जिसके लिए विशेष वाणिज्यिक अदालतों और डिजिटल भूमि स्वामित्व दस्तावेजों जैसे सुधारों की आवश्यकता है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

केंद्रीय बजट 2026-27 में आर्थिक विकास के एक प्रमुख आधार के रूप में व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) को और अधिक महत्व दिया गया है। (इन्फोग्राफिक्स देखें)

व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) के बारे में 

  • यह किसी देश के नियमों और संस्थागत ढांचे की गुणवत्ता को दर्शाता है, जिससे यह निर्धारित होता है कि व्यवसाय को प्रारंभ करना, संचालित करना, नियमों का पालन करना और उसे बंद करना कितना सरल है।
  • भारत में EoDB की स्थिति: 
    • विश्व में स्थान: विश्व बैंक की डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट 2019 के अनुसार भारत 63वें स्थान पर था। इसकी रैंक में विगत 5 वर्षों में 79 स्थानों का सुधार हुआ है।
    • व्यवसाय पंजीकरण में वृद्धि: पिछले 5 वर्षों (2020–21 से 2025–26) में लगभग 27% वृद्धि हुई है।

EoDB का महत्व

  • निवेश और वैश्विक व्यापार के अवसर आकर्षित करना: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी स्पष्ट और स्थिर नीतियों ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ने में सहायता की है, जिससे देश इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है।
  • लघु उद्योगों (MSMEs) की सहायता: नियमों को सरल बनाने से MSMEs के लिए अनावश्यक बाधाएं दूर होती हैं।
    • उद्यम पंजीकरण और व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली (TReDS) जैसे प्लेटफॉर्म उन्हें आधिकारिक पहचान दिलाने के साथ-साथ नकदी प्रवाह तक शीघ्र पहुंच प्रदान करते हैं।
  • सुशासन: फेसलेस कर मूल्यांकन और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम मानव विवेकाधिकार आधारित हस्तक्षेप को समाप्त करते हैं, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आती है।
  • रोजगार सृजन: व्यवसाय प्रारंभ करने में बाधाओं को कम करने से (जैसे- स्टार्ट-अप इंडिया के माध्यम से) नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलता है और भारत की बड़ी युवा आबादी के लिए रोजगार सृजन में सहायता मिलती है।
  • दक्षता और नवाचार को बढ़ावा: पीएम गति शक्ति जैसी मास्टर योजनाओं के माध्यम से लॉजिस्टिक्स और लेन-देन लागत कम होती है। इसलिए कंपनियां अनुपालन प्रबंधन से पूंजी हटाकर अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश कर सकती हैं।

EoDB से संबंधित चुनौतियां 

  • धीमी न्यायिक प्रणाली: 4.6 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के कारण लगभग ₹25 लाख करोड़ की बड़ी राशि वाणिज्यिक विवादों में फंसी हुई है, जिसके कारण दीर्घकालिक निवेशक चिंतित रहते हैं।
  • बड़े निगमों के पक्ष में असंतुलन: व्यवसाय करने में सुगमता के हालिया सुधारों का लाभ मुख्यतः बड़े निगमों को मिला है, क्योंकि वे GST अनुपालन, ई-इन्वॉयसिंग जैसी नई प्रणालियों को अपनाने में सक्षम हैं।
  • कार्यान्वयन में असमानता: जहां उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों ने व्यावसायिक सुधारों को पूर्ण रूप से अपनाया है, वहीं अन्य राज्य पीछे हैं, जिसके कारण विदेशी निवेश मुख्यतः कुछ अग्रणी राज्यों तक सीमित रह जाता है।
  • भूमि और श्रम संबंधी बाधाएं: भूमि एक जटिल राज्य विषय बनी हुई है, जहां स्पष्ट और डिजिटाइज्ड अभिलेखों का अभाव है।
    • इसके अतिरिक्त, कार्यबल में औपचारिक कौशल की अत्यधिक कमी के कारण पूंजी-गहन विकास और श्रम-प्रधान विनिर्माण की आवश्यकताओं के बीच असंतुलन उत्पन्न होता है।

व्यवसाय करने की सुगमता (EoDB) को समर्थन देने वाले अन्य सुधार

  • व्यापार सुधार कार्य योजना (BRAP): उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा 2014 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, अनुपालन का बोझ कम करना तथा डिजिटल समाधानों के माध्यम से भारत के व्यावसायिक वातावरण को बेहतर बनाना है।
  • नियामक अनुपालन बोझ (RCB) पहल:  यह पहल 2020 में प्रारंभ की गई थी। यह पहल केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एक 'स्व-पहचान' अभ्यास करने में सक्षम बनाती है, जिसका उद्देश्य व्यवसायों और नागरिकों के लिए बोझिल अनुपालनों को कम करना है।
    • पिछले 5 वर्षों में लगभग 47,000 अनुपालनों को समाप्त किया गया।
  • विधायी सुधार
    • जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023: 19 मंत्रालयों/विभागों द्वारा संचालित 42 अधिनियमों के अंतर्गत 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है।
    • सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025:  इस अधिनियम के माध्यम से बीमा अधिनियम, 1938; जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956; तथा बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 में संशोधन कर व्यापक सुधार किए गए हैं। इससे पॉलिसीधारकों की सुरक्षा मजबूत होती है, बीमा का प्रसार होता है तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है।
  • डिजिटल पहल
    • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS):  व्यवसायों के लिए स्वीकृतियों एवं अनुमतियों को आसान बनाने हेतु एकीकृत मंच।
    • MCA21 संस्करण 3: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्लेटफार्म है, जो ई-संवीक्षा और ई-अधिनिर्णयन जैसी सुविधाओं के साथ संपूर्ण रजिस्ट्री सेवाएं प्रदान करता है।
    • SPICe+ फॉर्म: DIN, PAN, TAN और GSTIN सहित 10 आवश्यक प्रक्रियाओं को एक ही ऑनलाइन फॉर्म में समाहित करता है।
    • पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (NMP):  स्थानिक डेटा का उपयोग कर लॉजिस्टिक लागत कम करने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार करने में सहायक है।
    • यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP): विभिन्न मंत्रालयों की 35 से अधिक प्रणालियों को जोड़कर वास्तविक समय में माल की ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • अन्य उपाय: 
    • MSMEs के लिए क्रेडिट असेसमेंट मॉडल (CAM) : डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापित डेटा के आधार पर स्वचालित ऋण मूल्यांकन की सुविधा देकर EoDB में सुधार करता है।
    • श्रम सुधार: 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में समाहित करने से अनुपालन सरल हुआ, अनुमोदन की समयसीमा कम हुई तथा विशेषकर MSMEs के लिए परिचालन में अधिक लचीलापन प्राप्त हुआ है।
    • GST 2.0:  कर संरचना को सरल बनाकर और विभिन्न क्षेत्रों में दरों को कम करके कर भार घटाया गया है, जिससे व्यवसाय की सुगमता में वृद्धि हुई है।
    • स्टार्टअप पारितंत्र का समर्थन:  स्टार्टअप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन, जेनेसिस (इनोवेटिव स्टार्टअप के लिए जेन-नेक्स्ट सपोर्ट), TIDE 2.0, निधि आदि योजनाओं के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया गया है।
    • क्रेडिट गारंटी योजनाएं:  MSMEs और स्टार्टअप्स को बिना जमानत या तृतीय पक्ष गारंटी के ऋण प्रदान करती हैं, जैसे - 
      • क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज,  
      • स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम आदि।

आगे की राह 

  • न्यायिक दक्षता एवं ADR का मुख्यधारा में समावेशन: जिला स्तर पर विशेष वाणिज्यिक न्यायालयों की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि विवाद समाधान की अवधि जो वर्तमान में लगभग 1,400 दिन है  से घटाकर वैश्विक औसत 400 दिनों तक हो सके।
    • विवादों के निपटान से पहले वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को अनिवार्य बनाने से मामलों की लंबित संख्या कम होगी तथा अनुबंध प्रवर्तन की लागत भी घटेगी।
  • D-BRAP के माध्यम से स्थानीयकरण: सुधारों का केंद्र राज्य की राजधानियों से हटाकर नगरपालिकाओं तक लाया जाए, इसके लिए जिला व्यापार सुधार कार्य योजना (D-BRAP) को लागू किया जाए।
    • शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को निर्माण अनुमति एवं उपयोगिता सेवाओं के कनेक्शन को सुचारू रूप से प्रदान करने हेतु डिजिटल अवसंरचना से सुसज्जित किया जाना चाहिए।
  • U-PIN के माध्यम से भूमि सुधार: विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (U-PIN) को देशभर में शीघ्र लागू किया जाए, जो "भूमि का आधार" के रूप में कार्य करेगा। इससे विवाद-मुक्त डिजिटल भूमि अभिलेख तैयार होंगे और औद्योगिक भूमि अधिग्रहण में जोखिम कम होगा।
  • विश्वास आधारित शासन व्यवस्था : छोटी प्रशासनिक त्रुटियों को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यवसायों को कारावास के भय से मुक्त किया जाना चाहिए।
    • सूक्ष्म उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणन  प्रणाली अपनाई जाए, जिससे यादृच्छिक एवं जोखिम-आधारित निरीक्षण किए जाएं।
  • ESG एवं B-READY मानकों के साथ समन्वय: विश्व बैंक के आगामी B-READY सूचकांक में उच्च स्थान प्राप्त करने के लिए भारत को पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को अपनाना होगा। साथ ही, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का उपयोग कर पूर्णतः कागजरहित अनुपालन प्रणाली विकसित करनी होगी।

निष्कर्ष

व्यवसाय करने की सुगमता को केवल एक सूचकांक न मानकर, इसे राज्य की क्षमता सुधार के रूप में देखना चाहिए, जो निवेश, उद्यम विकास, निर्यात प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन को प्रभावित करता है।

भारत के संदर्भ में बेहतर EoDB से औपचारिकरण को बढ़ावा मिलेगा, MSMEs की स्थिरता में सुधार होगा, नागरिक और राज्य के बीच घर्षण कम होगा तथा विकास अधिक व्यापक और संतुलित बनेगा। इसकी वास्तविक सफलता केवल रैंकिंग सुधार में नहीं, बल्कि एक ऐसे पूर्वानुमेय, पारदर्शी और स्थानीय रूप से सक्षम तंत्र के निर्माण में निहित है, जहां उद्यमिता को बढ़ावा मिले और साथ ही श्रम कल्याण एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी से समझौता न हो।

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डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)

यह एक ऐसी प्रणाली है जो डिजिटल रूप से नागरिक सेवाओं, शासन और वित्तीय समावेशन को सक्षम बनाती है। इसमें पहचान, भुगतान और डेटा विनिमय जैसे घटक शामिल हो सकते हैं।

पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानक

ये गैर-वित्तीय प्रदर्शन को मापने के लिए मानक हैं जो एक कंपनी के परिचालन में स्थिरता और नैतिक व्यवहार को दर्शाते हैं। विश्व बैंक के B-READY सूचकांक जैसे अंतर्राष्ट्रीय सूचकांकों में अच्छे प्रदर्शन के लिए ये महत्वपूर्ण हैं।

विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (U-PIN)

भूमि के प्रत्येक पार्सल को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भूमि अभिलेखों को डिजिटाइज करना और विवादों को कम करना है।

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