'जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण' नामक यह परियोजना केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा शुरू की गई है।
परियोजना के बारे में
- संयुक्त पहल: यह भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की संयुक्त पहल है।
- वित्तीय अनुदान: 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर।
- क्रियान्वयन अवधि: 5 वर्ष के लिए (2025-2030)।
- अवस्थिति:
- तमिलनाडु में: पश्चिमी और पूर्वी घाटों के संगम पर सत्यमंगलम भूक्षेत्र, जिसमें मुदुमलाई टाइगर रिजर्व और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
- मेघालय में: गारो हिल्स में नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभयारण्य।
- उद्देश्य:
- पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) को मजबूत करने के लिए स्थानीय विकास योजनाओं में जैव विविधता को मुख्यधारा में लाना।
- अभिनव माध्यमों से वित्तपोषण को बढ़ावा देना। इनमें कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत सह-वित्तपोषण, हरित सूक्ष्म उद्यम, आदि शामिल हैं।
- महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातीय समुदायों की क्षमता निर्माण करना।
- संशोधित राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (2024-2030); पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) आदि को आगे बढ़ाना।
भारत में जैव विविधता शासन ढांचा
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