केंद्र सरकार ने ‘लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (FIT)’ ढांचा के तहत 2026-2031 के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य अधिसूचित किया | Current Affairs | Vision IAS

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वर्ष 2016 में, भारत में ‘लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ( Flexible Inflation Targeting: FIT)’ के कार्यान्वयन के लिए वैधानिक आधार प्रदान करने हेतु भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में संशोधन किया गया था।

  • FIT फ्रेमवर्क की सिफारिश डॉ. उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई थी।

FIT फ्रेमवर्क के बारे में

  • भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के अनुसार, केंद्र सरकार RBI के परामर्श से प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के संदर्भ में मुद्रास्फीति का लक्ष्य निर्धारित करेगी।
  • लक्ष्य: केंद्र सरकार ने 2016-2021 की अवधि के लिए 4% का मुद्रास्फीति लक्ष्य अधिसूचित किया था। इसमें 6% की ऊपरी सह्य सीमा (upper tolerance band) और 2% की निचली सह्य सीमा (lower tolerance band) निर्धारित की गई थी। अर्थात, मुद्रास्फीति को 2% से  6% के बीच नियंत्रित रखना था। 
    • इस लक्ष्य को 2021-2026 के लिए बरकरार रखा गया था और अब इसे 2026-2031 के लिए भी जारी रखा गया है।
  • लक्ष्य प्राप्ति के लिए MPC का गठन : आरबीआई अधिनियम मुद्रास्फीति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत दरें निर्धारित करने हेतु एक मौद्रिक नीति समिति (MPC) के गठन का प्रावधान करता है।
    • मौद्रिक नीति समिति (MPC) की संरचना: यह छह सदस्यीय निकाय है जिसमें शामिल हैं:
      • आरबीआई के गवर्नर (पदेन अध्यक्ष)
      • आरबीआई के डिप्टी गवर्नर (मौद्रिक नीति के प्रभारी)
      • आरबीआई का एक अधिकारी-आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित  
      • केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाहरी सदस्य: अर्थशास्त्र, बैंकिंग, वित्त या मौद्रिक नीति में विशेषज्ञता रखने वाले।  
  • नीतिगत विफलता: यदि मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक सह्य सीमा (2% से 6% के बीच) से बाहर रहती है, तो इसे मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क की विफलता माना जाता है। 
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नीतिगत विफलता (Policy Failure)

मौद्रिक नीति के संदर्भ में, यदि मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक निर्धारित सह्य सीमा (2% से 6% के बीच) से बाहर रहती है, तो इसे मौद्रिक नीति ढाँचे की विफलता माना जाता है।

मौद्रिक नीति समिति (MPC)

यह एक छह सदस्यीय समिति है जिसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर करते हैं। इसका मुख्य कार्य नीतिगत रेपो दर को निर्धारित करना है ताकि मुद्रास्फीति को लक्षित सीमा के भीतर रखा जा सके, जबकि आर्थिक विकास को ध्यान में रखा जा सके।

सह्य सीमा (tolerance band)

यह मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के संदर्भ में उपयोग की जाने वाली एक सीमा है, जिसके भीतर मुद्रास्फीति दर को स्वीकार्य माना जाता है। भारत में, यह 2% से 6% के बीच निर्धारित है, जिसमें 4% लक्ष्य है।

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