‘उड़ान’ योजना के तहत हवाई अड्डों का विकास अब ‘चैलेंज मोड’ के तहत किया जाएगा। इससे योजना के समय पर पूरा होने, गुणवत्ता, नवाचार और सततता के नए मानक स्थापित होंगे।
संशोधित उड़ान योजना के बारे में
- योजना अवधि: 10 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36)
- कुल परिव्यय: ₹28,840 करोड़
- योजना के घटक:
- एरोड्रोम विकास (CAPEX): क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए अप्रयुक्त हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे। यह लक्ष्य 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
- संचालन एवं रखरखाव (O&M): लगभग 441 केवल RCS एरोड्रोम के लिए 3 वर्षों तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता प्रति हवाई अड्डे अधिकतम ₹3.06 करोड़ और प्रति हेलीपोर्ट/वाटर एरोड्रोम ₹0.90 करोड़ तक सीमित होगी।
- आधुनिक हेलीपैड: लास्ट माइल कनेक्टिविटी और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ाने के लिए दूरदराज, पहाड़ी और आकांक्षी क्षेत्रों में 200 हेलीपैड का विकास किया जाएगा।
- वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF): क्षेत्रीय हवाई मार्गों में परिचालन बनाए रखने हेतु एयरलाइन ऑपरेटरों को 10 वर्षों में ₹10,043 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
- आत्मनिर्भर यानी स्वदेशी विमान की खरीद को बढ़ावा: दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में विमान परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए HAL ध्रुव हेलीकॉप्टरों और डोर्नियर विमानों की खरीद की जाएगी।
उड़ान/UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के बारे में
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