विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया गया | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी निधियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना, एक नामित प्राधिकरण के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना और दंड को तर्कसंगत बनाना है, लेकिन यह अत्यधिक प्रत्यायोजन और नागरिक समाज के लिए सीमित स्थान को लेकर चिंताएं भी पैदा करता है।
  • एफसीआरए, 2010, राष्ट्रीय हित के लिए विदेशी निधियों को विनियमित करता है, जिसके तहत पंजीकरण अनिवार्य है और कुछ व्यक्तियों को दान प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है; घरेलू हस्तांतरण और प्रशासनिक व्यय को प्रतिबंधित करने के लिए 2020 में इसमें संशोधन किया गया।

In Summary

यह विधेयक विदेशी अंशदान (फंड) के दुरुपयोग को रोकने तथा अंशदान प्राप्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • "निर्धारित प्राधिकरण" का गठन: किसी NGO का पंजीकरण रद्द होने, इसे समर्पित करने (surrender) या नवीनीकरण नहीं होने की दशा में विदेशी अंशदान से निर्मित परिसंपत्तियों को संभालने, प्रबंधित करने या निपटान करने के लिए इस प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।
    • यदि पंजीकरण बहाल नहीं होता है, तो उपर्युक्त प्राधिकरण परिसंपत्तियों को स्थानांतरित कर सकता है या बेच सकता है और इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा होगी। इस निर्णय के खिलाफ केवल न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
  • दंड को युक्तिसंगत बनाया गया: अधिकतम कारावास 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष किया गया।
  • पूर्व-स्वीकृति आवश्यक: केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी जांच शुरू नहीं की जा सकती।
  • NGO के मुख्य पदाधिकारी की नई परिभाषा: परिभाषा का विस्तार करके NGO के निदेशक, साझेदार, ट्रस्टी और संगठन के कार्यों को नियंत्रित करने वाले पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।
  • अन्य प्रावधान:
    • पूर्व-अनुमति श्रेणी के तहत फंड के उपयोग के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है; 
    • पंजीकरण के निलंबन के दौरान परिसंपत्तियों के प्रबंधन का विनियमन किया जाएगा; 
    • समय पर पंजीकरण नवीनीकरण न होने पर FCRA पंजीकरण स्वतः समाप्त हो जाएगा।

विधेयक से जुड़ी प्रमुख चिंताएं

  • अत्यधिक प्रत्यायोजन (Excessive Delegation): महत्वपूर्ण पहलुओं (परिसंपत्ति का प्रबंधन, समय-सीमा, अपील) को कानून के द्वारा प्रशासित करने की बजाय सरकारी नियमों पर छोड़ दिया गया है।
  • लोकतंत्र से जुड़ी चिंताएँ: संगठन के संचालन व उल्लंघन से जुड़े दायित्यों की जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से पदाधिकारियों पर सौंपने, साक्ष्य प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी एनजीओ व इसके पदाधिकारियों पर डालने से एनजीओ के कार्य करने की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। इससे उनके बीच अनिश्चितता और डर का माहौल बन सकता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 300A: पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना नामित प्राधिकरण द्वारा एनजीओ की संपत्तियों पर कार्यपालिका का व्यापक नियंत्रण संभावित रूप से संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 14: पहले से अनुमति लेने की शर्त का गलत तरीके से इस्तेमाल हो सकता है, जिससे कुछ लोगों पर ही नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे 'विधि के समक्ष समानता'  का मूल अधिकार कमजोर पड़ सकता है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 के बारे में

  • उद्देश्य: राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिए कुछ व्यक्तियों, संगठनों या कंपनियों द्वारा विदेशी धन की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करना।
  • कब लागू हुआ: यह कानून 2011 में लागू हुआ था और इसमें 2016, 2018 और 2020 में संशोधन किए गए हैं।
  • पंजीकरण: विदेशी अंशदान या फंड प्राप्त करने के लिए NGOs को केंद्रीय गृह मंत्रालय में पंजीकरण कराना आवश्यक है। पंजीकरण 5 वर्ष के लिए वैध रहता है।
  • प्रतिबंध: चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, समाचार पत्र के संपादक या प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी आदि विदेशी अंशदान नहीं प्राप्त कर सकते हैं।
  • 2020 में संशोधन: FCRA में 2020 के संशोधन के जरिए NGO को विदेशी अंशदान को किसी अन्य को हस्तांतरण करने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, संगठनों के प्रशासनिक व्यय को 20% तक सीमित कर दिया गया है।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

प्रशासनिक व्यय (Administrative Expenses)

किसी संगठन द्वारा अपने संचालन को बनाए रखने के लिए किए जाने वाले खर्चे, जैसे वेतन, किराया, कार्यालय आपूर्ति आदि। FCRA 2020 के संशोधन के तहत, NGOs के लिए इस व्यय को विदेशी अंशदान का 20% तक सीमित कर दिया गया है।

संविधान का अनुच्छेद 14

यह अनुच्छेद 'विधि के समक्ष समानता' और 'विधियों का समान संरक्षण' की गारंटी देता है। यह सुनिश्चित करता है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या भारत के क्षेत्र के भीतर विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा, जिससे मनमाने भेदभाव को रोका जा सके।

संविधान का अनुच्छेद 300A

यह अनुच्छेद बताता है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ है कि संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है, और सरकार केवल कानून के तहत ही इस अधिकार को प्रतिबंधित या समाप्त कर सकती है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet