विश्व आर्थिक मंच के अनुसार भारत वैश्विक इलेक्ट्रो-टेक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • भारत इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के औद्योगीकरण के माध्यम से आर्थिक विकास को कार्बन उत्सर्जन से अलग कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में छह गुना वृद्धि होकर 130 अरब डॉलर और 25 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं।
  • भारत सौर ऊर्जा क्षमता (120 गीगावाट मॉड्यूल क्षमता, 9% बिजली उत्पादन) और तीन पहिया वाहनों के बाजार हिस्सेदारी (लगभग 60%) में अग्रणी है।
  • पीएलआई योजनाओं और एफएएमई इंडिया जैसी पहलें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित कर रही हैं, जिससे भारत एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता और विद्युत औद्योगिक युग में अग्रणी के रूप में स्थापित हो रहा है।

In Summary

भारत “इलेक्ट्रोटेक” (इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और एडवांस्ड बैटरी सिस्टम्स) के जरिए औद्योगिकीकरण कर रहा है, और इस तरह भारत अपनी आर्थिक संवृद्धि को कार्बन उत्सर्जन से अलग कर रहा है। 

  • यह पश्चिमी देशों और चीन ने जो रास्ता अपनाया था, उससे अलग है क्योंकि इन देशों में आर्थिक विकास से बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन हुआ था। 

इलेक्ट्रो-टेक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की प्रमुख उपलब्धियां

  • इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: इसका आकार पिछले दशक में छह गुना बढ़कर 2024-25 में 130 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे 25 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। उदाहरण के लिए, भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है।
  • सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धिसौर मॉड्यूल क्षमता 120 गीगावाट तक पहुंच गई है, और 2025 में भारत ने अपनी 9% बिजली सौर ऊर्जा से उत्पन्न की।
  • इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अग्रणी: कुल तिपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन की लगभग 60% हिस्सेदारी है। पैसेंजर वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 5% है।

भारत द्वारा शुरू की गई पहलें

  • उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं: एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC)ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स आदि के लिए शुरू की गई हैं।
    • उदाहरण के लिए: इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने वित्त वर्ष 2020 से अब तक 4 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स विनिर्माण योजना (ECMS): इसका उद्देश्य भारत में मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण प्रणाली की स्थापना है।
  • FAME इंडिया योजना और पीएम ई-ड्राइव योजना: ये योजनाएं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एंबुलेंस को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं।

भारत के लिए महत्व

  • भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता: जैसे-जैसे विकसित अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए "चीन प्लस वन" रणनीति अपना रही हैं, भारत खुद को एक भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित कर रहा है।
  • वैश्विक नेतृत्व: भारत का "क्लीन फर्स्ट" मॉडल 'ग्लोबल साउथ' के लिए विकास के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। यह स्थिति भारत को एक नए, इलेक्ट्रिक औद्योगिक युग के अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता: तेल पर निर्भरता कम करके भारत ‘पेट्रो-देशों’ के प्रभाव को कम कर रहा है। साथ ही, प्रौद्योगिकी का केवल उपयोगकर्ता होने से आगे बढ़कर विनिर्माता बन रहा है। इससे भारत अपनी भू-राजनीतिक कमजोरियों को कम कर रहा है, जो पहले उसकी विदेश नीति को सीमित करती थीं।
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रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)

किसी देश की अपनी राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और अपनी विदेश और सुरक्षा नीतियों को चलाने की क्षमता, बिना किसी बाहरी शक्ति के अत्यधिक दबाव या प्रभाव के।

ग्लोबल साउथ (Global South)

विकासशील और अविकसित देशों का एक समूह, जो अक्सर भौगोलिक रूप से दक्षिणी गोलार्ध में स्थित होते हैं। यह शब्द आर्थिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में भी प्रयोग किया जाता है।

चीन प्लस वन (China Plus One) रणनीति

यह एक आपूर्ति श्रृंखला रणनीति है जिसमें कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए चीन के अलावा एक और देश में विनिर्माण या सोर्सिंग विकल्प तलाशती हैं। भारत इस रणनीति का लाभ उठाकर एक भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने का लक्ष्य रख रहा है।

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