भारत “इलेक्ट्रोटेक” (इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और एडवांस्ड बैटरी सिस्टम्स) के जरिए औद्योगिकीकरण कर रहा है, और इस तरह भारत अपनी आर्थिक संवृद्धि को कार्बन उत्सर्जन से अलग कर रहा है।
- यह पश्चिमी देशों और चीन ने जो रास्ता अपनाया था, उससे अलग है क्योंकि इन देशों में आर्थिक विकास से बड़ी मात्रा में कार्बन का उत्सर्जन हुआ था।
इलेक्ट्रो-टेक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की प्रमुख उपलब्धियां
- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: इसका आकार पिछले दशक में छह गुना बढ़कर 2024-25 में 130 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे 25 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। उदाहरण के लिए, भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता बन गया है।
- सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि: सौर मॉड्यूल क्षमता 120 गीगावाट तक पहुंच गई है, और 2025 में भारत ने अपनी 9% बिजली सौर ऊर्जा से उत्पन्न की।
- इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अग्रणी: कुल तिपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन की लगभग 60% हिस्सेदारी है। पैसेंजर वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 5% है।
भारत द्वारा शुरू की गई पहलें
- उत्पादन-से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं: एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC), ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स आदि के लिए शुरू की गई हैं।
- उदाहरण के लिए: इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग ने वित्त वर्ष 2020 से अब तक 4 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स विनिर्माण योजना (ECMS): इसका उद्देश्य भारत में मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण प्रणाली की स्थापना है।
- FAME इंडिया योजना और पीएम ई-ड्राइव योजना: ये योजनाएं इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन, इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहन, ई-ट्रक, ई-बस और ई-एंबुलेंस को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं।
भारत के लिए महत्व
|