आयकर अधिनियम, 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर लागू किया गया है। इस नए अधिनियम के निम्नलिखित उद्देश्य हैं;
- कर प्रणाली में पूर्वानुमेयता (प्रिडिक्टिबिलिटी) और पारदर्शिता बढ़ाना,
- नियमों के अनुपालन का बोझ कम करना, तथा
- करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने की सरल और सुव्यवस्थित प्रक्रिया प्रदान करना।
आयकर अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधान
- सरल भाषा और ढांचा: अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 की जगह 536 रह गई है जबकि आवेदनों यानी फॉर्म्स की संख्या 390 से कम होकर 190 रह गई है।
- न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) और वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) के प्रावधानों को दो उप-खंडों में विभाजित किया गया है।
- न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT): इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों को भी टैक्स के दायरे में लाना है, जो अच्छा मुनाफा और लाभांश (डिविडेंड) कमाने के बावजूद अलग-अलग कर छूट और रियायतों की वजह से कोई टैक्स नहीं देती थीं।
- वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT): इसके प्रावधान MAT जैसे ही होते हैं, लेकिन ये कर गैर-कॉर्पोरेट करदाताओं (जैसे व्यक्ति, साझेदारी फर्म आदि) पर लागू होते हैं।
- न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) के प्रावधान केवल कॉर्पोरेट करदाताओं पर लागू होते हैं।
- "कर वर्ष (टैक्स ईयर)" की अवधारणा: पहले की अलग-अलग वित्तीय वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (Assessment Year: AY) की अवधारणाओं को मिलाकर एकीकृत शब्द “कर वर्ष (टैक्स ईयर)” कर दिया गया है।
- आयकर के मूल तत्वों में स्थिरता:
- व्यक्तियों और कंपनियों के लिए कर दरों और संरचनाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- अपराध और दंड से संबंधित प्रावधानों में भी कोई परिवर्तन नहीं है।
- अधिकतर परिभाषाओं को यथावत रखा गया है।
- सूचना संग्रह और कर आकलन की प्रक्रिया को फेसलेस बनाया गया है।
- अघोषित आय (Undisclosed Income): आयकर छापों से जुड़े मामलों के आकलन के लिए अघोषित आय की परिभाषा में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को भी शामिल कर दिया गया है। पहले इसमें नकद, सोना-चांदी (बुलियन), आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं शामिल थीं।
- वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुंच: अब आयकर अधिकारियों को तलाशी और जब्ती की कार्यवाही के दौरान वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुंच की अनुमति है।
- “वर्चुअल डिजिटल स्पेस” में ईमेल सर्वर, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग अकाउंट तथा संपत्ति स्वामित्व से संबंधित विवरण रखने वाली वेबसाइट्स शामिल हैं।