नया आयकर अधिनियम 2025, एक अप्रैल 2026 से लागू हुआ | Current Affairs | Vision IAS

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आयकर अधिनियम, 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर लागू किया गया है। इस नए अधिनियम के निम्नलिखित उद्देश्य हैं;

  • कर प्रणाली में पूर्वानुमेयता (प्रिडिक्टिबिलिटी) और पारदर्शिता बढ़ाना, 
  • नियमों के अनुपालन का बोझ कम करना, तथा 
  • करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने की सरल और सुव्यवस्थित प्रक्रिया प्रदान करना।

आयकर अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधान

  • सरल भाषा और ढांचा: अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 की जगह 536 रह गई है जबकि आवेदनों यानी फॉर्म्स की संख्या 390 से कम होकर 190 रह गई है।
  • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) और वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) के प्रावधानों को दो उप-खंडों में विभाजित किया गया है।
    • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT): इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों को भी टैक्स के दायरे में लाना है, जो अच्छा मुनाफा और लाभांश (डिविडेंड) कमाने के बावजूद अलग-अलग कर छूट और रियायतों की वजह से कोई टैक्स नहीं देती थीं।
    • वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT): इसके प्रावधान MAT जैसे ही होते हैं, लेकिन ये कर गैर-कॉर्पोरेट करदाताओं (जैसे व्यक्ति, साझेदारी फर्म आदि) पर लागू होते हैं।
      • न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) के प्रावधान केवल कॉर्पोरेट करदाताओं पर लागू होते हैं।
  • "कर वर्ष (टैक्स ईयर)" की अवधारणा: पहले की अलग-अलग वित्तीय वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (Assessment Year: AY) की अवधारणाओं को मिलाकर एकीकृत शब्द “कर वर्ष (टैक्स ईयर)” कर दिया गया है।
  • आयकर के मूल तत्वों में स्थिरता:
    • व्यक्तियों और कंपनियों के लिए कर दरों और संरचनाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
    • अपराध और दंड से संबंधित प्रावधानों में भी कोई परिवर्तन नहीं है।
    • अधिकतर परिभाषाओं को यथावत रखा गया है।
    • सूचना संग्रह और कर आकलन की प्रक्रिया को फेसलेस बनाया गया है।
  • अघोषित आय (Undisclosed Income): आयकर छापों से जुड़े मामलों के आकलन के लिए अघोषित आय की परिभाषा में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को भी शामिल कर दिया गया है। पहले इसमें नकद, सोना-चांदी (बुलियन), आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं शामिल थीं। 
  • वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुंच: अब आयकर अधिकारियों को तलाशी और जब्ती की कार्यवाही के दौरान वर्चुअल डिजिटल स्पेस तक पहुंच की अनुमति है।
    • “वर्चुअल डिजिटल स्पेस” में ईमेल सर्वर, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग अकाउंट तथा संपत्ति स्वामित्व से संबंधित विवरण रखने वाली वेबसाइट्स शामिल हैं।
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फेसलेस आकलन (Faceless Assessment)

यह कर संग्रह और आकलन की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें करदाता और कर अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत संपर्क कम किया जाता है। सूचना संग्रह और आकलन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के होती है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।

वर्चुअल डिजिटल स्पेस (Virtual Digital Space)

यह डिजिटल माध्यमों को संदर्भित करता है जहां जानकारी संग्रहीत की जाती है। इसमें ईमेल सर्वर, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग अकाउंट, और संपत्ति स्वामित्व से संबंधित विवरण रखने वाली वेबसाइटें शामिल हैं। आयकर अधिकारियों को तलाशी और जब्ती के दौरान इन तक पहुंचने की अनुमति है।

अघोषित आय (Undisclosed Income)

आयकर छापों से जुड़े मामलों में, यह उन आय को संदर्भित करता है जो करदाता द्वारा आयकर रिटर्न में घोषित नहीं की गई है। नए प्रावधानों में, इसमें वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को भी शामिल किया गया है, जबकि पहले यह मुख्य रूप से नकद, सोना और कीमती वस्तुओं जैसी भौतिक संपत्तियों से संबंधित थी।

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