प्रधान मंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY-G) की शुरुआत 2016 में हुई थी। यह 1996 में प्रारंभ हुई इंदिरा आवास योजना का पुनर्गठित रूप है।
PMAY-G की प्रमुख विशेषताएं
- उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में “सभी के लिए आवास” उपलब्ध कराना।
- यह योजना पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं युक्त पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस योजना के लिए वैसे परिवार पात्र हैं जिनका अपना घर नहीं है या कामचलाऊ घर है या वे 1 या 2 कमरों के कच्चे घरों में रहते हैं।

- लक्ष्य: केंद्र सरकार ने प्रारंभ में वित्त वर्ष 2016–17 से 2023–24 तक 2.95 करोड़ घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा था। अब सरकार ने अगले पांच वर्षों (2024–25 से 2028–29) के लिए 2 करोड़ अतिरिक्त घरों के निर्माण के लक्ष्य के साथ योजना को जारी रखने की मंजूरी दी है।
- वित्तीय सहायता: घर का न्यूनतम आकार 25 वर्ग मीटर निर्धारित है। योजना के तहत पात्र परिवारों को मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी राज्यों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- वित्तपोषण: घर निर्माण में वित्तीय सहायता की लागत मैदानी क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में तथा पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10 के अनुपात में साझा की जाती है।
- लाभार्थियों का चयन: सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना (SECC), 2011 के ‘बुनियादी सुविधाओं से वंचित आवास’ मानकों के आधार पर, जिसे ग्राम सभाओं द्वारा सत्यापित किया जाता है।
- योजना की निगरानी: कार्यान्वयन और निगरानी एंड-टू-एंड ई-गवर्नेंस मॉडल के माध्यम से की जाती है। इसके लिए आवास सॉफ्ट और आवास ऐप का उपयोग किया जाता है।
- योजना के क्रियान्वयन की निगरानी समुदाय की भागीदारी (सोशल ऑडिट द्वारा), सांसद (दिशा समिति), केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी आदि के माध्यम से भी की जाती है।
योजना में किए गए सुधार
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