एक रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री मार्ग से ऊर्जा व्यापार का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा कुछ प्रमुख चोकपॉइंट्स पर निर्भर है। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, मलक्का जलडमरूमध्य जैसे चोकपॉइंट्स शामिल हैं।
- ये रणनीतिक समुद्री मार्ग यानी चोकपॉइंट्स युद्धक्षेत्र के बाहर भी संघर्ष की गंभीरता, ऊर्जा की कीमतों और वैश्विक वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं।
चोकपॉइंट्स क्या हैं?

- चोकपॉइंट्स रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संकीर्ण समुद्री-मार्ग हैं। ये वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
चोकपॉइंट्स का महत्व
- व्यापार और ऊर्जा की जीवन-रेखा: चोकपॉइंट्स अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, खासकर तेल, गैस और अन्य वस्तुओं (जैसे उर्वरक) की आपूर्ति के लिए। ये वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट का कारण बन सकते हैं।
- आर्थिक प्रभाव: चोकपॉइंट्स पर किसी भी तरह की बाधा से माल ढुलाई (फ्रेट) की लागत बढ़ जाती है, यात्रा का समय लंबा हो जाता है और बीमा प्रीमियम भी बढ़ जाते हैं। इससे वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ती है और आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
- भू-राजनैतिक तनाव के केंद्र: इन चोकपॉइंट्स का अधिक रणनीतिक महत्व होने के कारण इनमें अक्सर सैन्य नाकेबंदी, क्षेत्रीय संघर्ष और समुद्री डकैती (पायरेसी) का खतरा बना रहता है। इससे वैश्विक कूटनीति और नौसैनिक रणनीतियों पर असर पड़ता है।
- जलवायु परिवर्तन का खतरा: पर्यावरण में परिवर्तन नए अवरोध पैदा कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, पनामा नहर में जल की कमी की वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
- औद्योगिक और डिजिटल क्षेत्रकों में जोखिम: अब चोकपॉइंट्स केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि औद्योगिक और डिजिटल प्रणालियों में भी दिखाई देते हैं।
- उदाहरण के लिए, दुर्लभ खनिजों (रेयर मिनरल्स) का प्रसंस्करण बहुत हद तक चीन में संकेंद्रित रिफाइनिंग क्षमता पर निर्भर करता है।
- एक अन्य उदाहरण-यूरोप-एशिया के बीच 90% से अधिक समुद्री केबल (सब-सी केबल) क्षमता रेड सी कॉरिडोर से गुजरती है, जिससे यह डिजिटल सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट बन जाता है।
भारत के लिए संभावित समाधान
|