भारत ने 2025-26 में 45 गीगावाट (GW) की सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। इसमें राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु शीर्ष योगदान देने वाले राज्यों के रूप में उभरे हैं।
भारत में सौर ऊर्जा
- सौर ऊर्जा की कुल संचयी क्षमता: 31 मार्च, 2026 तक सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 150.26 गीगावाट थी। 2014 में यह क्षमता 2.82 गीगावाट थी। इस तरह कुल स्थापित क्षमता में 147.44 गीगावाट जोड़ी गई है।
- विश्व में स्थान: IRENA की नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2025 के अनुसार सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।
भारत की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता में अधिक वृद्धि के कारण
- क्षेत्रीय उपयुक्तता: भारत के अधिकांश हिस्सों में साल में लगभग 300–330 दिन धूप रहती है और औसतन 4–7 किलोवाट-घंटा (kWh) प्रति वर्ग मीटर प्रति दिन सौर ऊर्जा मिलती है, जो सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए बहुत अनुकूल है।
- सहायक सरकारी योजनाएं:
- पीएम सूर्य घर: यह योजना 2024 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा प्रणाली लगाना है। दिसंबर 2025 तक 23.9 लाख घरों में इसकी स्थापना हो चुकी है।
- अन्य योजनाएं: पीएम-कुसुम, राष्ट्रीय सौर मिशन, सोलर पार्क और अल्ट्रा-मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाएं, आदि।
- घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि: सोलर फोटोवोल्टिक (SPV) के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत उच्च दक्षता वाले सोलर मॉड्यूल के गीगावाट स्तर के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे सितंबर 2025 तक लगभग 52,900 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ।
- विश्व में सौर ऊर्जा का नेतृत्व:
- भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का संस्थापक सदस्य है। इस गठबंधन का मुख्यालय गुरुग्राम में है।
- 2018 में 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिडों को आपस में जोड़ना है।
सौर ऊर्जा के बारे में
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