यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक कार्य विभाग (DESA) ने जारी की है। इसमें विकास के वित्तपोषण को सही दिशा में मोड़ने में “सेविला प्रतिबद्धता’ (Sevilla Commitment) की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट में रेखांकित मुख्य मुद्दे
- वैश्विक अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति: वैश्विक स्तर पर मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है और इसमें गिरावट की आशंका बनी हुई है।
- प्रत्येक चार में से एक विकासशील देश की प्रति व्यक्ति आय 2019 के स्तर से भी कम है।
- मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से ऊर्जा की कीमतों, व्यापार और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- वित्तीय दबाव: कई विकासशील देशों को ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ रहा है, कर्ज चुकाने/रीफाइनेंस (रोलओवर) का जोखिम बढ़ गया है। पिछले दो दशकों में विकासशील देशों में कर राजस्व में बहुत कम वृद्धि हुई है।
- अधिक विभाजित विश्व: इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और विकास में सहयोग की संरचना प्रभावित हो रही है। सीमा-पार भुगतान प्रणालियों में बदलाव दिख रहा है, जैसे स्विफ्ट (SWIFT) प्रणाली के विकल्पों का उभरना।
प्राथमिक कार्रवाइयाँ और सिफारिशें
- वित्तपोषण का विस्तार: सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति के लिए वित्तपोषण और निवेश में लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए घरेलू निजी क्षेत्र को मजबूत करना और अर्थव्यवस्था में विविधता को बढ़ावा देना जरूरी है।
- वित्तपोषण को सतत विकास के परिणामों से जोड़ना: यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी और सार्वजनिक, दोनों प्रकार का वित्तपोषण उच्च गुणवत्ता वाला हो और उसका वास्तविक प्रभाव पड़े, साथ ही, यह देश की अपनी विकास रणनीतियों के अनुरूप हो।
- लचीलापन (रेजिलिएंस) बढ़ाना: मजबूत घरेलू संस्थानों का निर्माण करना चाहिए। कर्ज, बीमा और निवेश जैसे वित्तीय उत्पादों में जोखिम का पहले से आकलन करना चाहिए, ताकि लचीलापन बढ़े और नुकसान कम हो सके।
- बहु-स्तरीय सहयोग आधारित दृष्टिकोण को अपनाना: राष्ट्रीय विकास बैंकों, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए और इनके बीच मजबूत संबंध बनाना चाहिए।
- बहुपक्षवाद की भूमिका: एक स्थिर, पूर्वानुमान योग्य और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे जोखिम कम होंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
सेविला प्रतिबद्धता के बारे में
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