प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 'महिला आरक्षण अधिनियम' को समय से पहले लागू करने के लिए एक संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी देने के बाद आई है। इस संशोधन विधेयक के द्वारा अधिनियम को वर्ष 2029 के आम चुनावों में लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
- इसके अलावा, इस मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में संसद का सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि और देरी महिला आरक्षण की दिशा में हुई प्रगति की गति को बाधित कर सकती है।
- साथ ही, एक नए परिसीमन (delimitation) कार्य के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के भीतर महिलाओं को वर्टिकल आरक्षण देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
महिला आरक्षण की पृष्ठभूमि
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन अधिनियम) के अनुसार, इस अधिनियम के लागू होने के बाद की पहली जनगणना के पश्चात किए जाने वाले परिसीमन कार्य के बाद महिला आरक्षण लागू होना था।
- हालांकि, 2027 की जनगणना के परिणाम का इंतजार करने से उपर्युक्त अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी हो सकती थी, इसलिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोजित करने से इसका शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अन्य प्रमुख प्रावधान
- पारित कब हुआ: नारी शक्ति वंदन विधेयक वर्ष 2023 में संसद से पारित होने के बाद अधिनियम बना।
- विधायिका में महिलाओं के लिए आरक्षण: लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गई हैं।
- यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा।
- सीटों का रोटेशन:महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का परिसीमन के बाद प्रत्येक बार रोटेशन (परिवर्तित) किया जाएगा, जैसा कि संसद द्वारा निर्धारित कानून में प्रावधान होगा।
- अधिनियम के द्वारा संविधान में निम्नलिखित नए अनुच्छेदों को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है:
- अनुच्छेद 330A: लोकसभा में आरक्षण।
- अनुच्छेद 332A: राज्य विधानसभाओं में आरक्षण।
- अनुच्छेद 239AA: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में आरक्षण।
