देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं | Current Affairs | Vision IAS

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बरौनी (बिहार), सूरत (गुजरात), मानेसर (हरियाणा) और नोएडा (उत्तर प्रदेश) में श्रमिकों के हाल के विरोध प्रदर्शनों ने चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।

  • श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में पूर्वव्यापी प्रभाव से वृद्धि (retrospective hike) कर दी है।

श्रमिकों के बढ़ते विरोध-प्रदर्शन  के मुख्य कारण

  • हालिया ऊर्जा संकट: ईंधन की कमी या इनके मूल्यों में वृद्धि के कारण प्रवासी कामगारों के लिए जीवनयापन लागत बढ़ गई है।
  • श्रम कानूनों से संबंधित चिंताएं: 'मजदूरी संहिता' (Code on Wages) राष्ट्रीय न्यूनतम आधार मजदूरी (National Floor Wage) और राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान करती है, लेकिन इन्हें तय करने का कोई स्पष्ट तरीका नहीं बताती।
  • अधिकांशतया अनौपचारिक क्षेत्रक होना: भारत के 80% से अधिक कामगार अनौपचारिक क्षेत्रक में कार्य करते हैं। इनमें से अधिकांश को श्रम संहिताओं द्वारा प्राप्त सुरक्षा प्रावधानों का लाभ नहीं मिलता है।
  • बेहतर सुविधाओं की मांग: आवास, कार्यस्थल पर सुरक्षा, पर्याप्त वेंटिलेशन, प्रकाश व्यवस्था, नियमित बोनस आदि के संदर्भ में नियोक्ताओं द्वारा मांगों का पूरा न कर पाने के कारण भी श्रमिकों में असंतोष है।
  • ट्रेड यूनियनों के साथ मुद्दे: एक ही उद्योग में कई ट्रेड यूनियन होने से आपसी टकराव उत्पन्न होता है। साथ ही, कुछ श्रमिक संघ राजनीतिक प्रभाव में होते हैं और वे मजदूरों के हितों पर पूरा ध्यान नहीं देते।

किए गए प्रमुख सुधार 

  • सामाजिक सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) के दायरे में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को शामिल किया गया है। ऑनलाइन एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के कल्याण कोष में अंशदान देना होगा, लेकिन यह राशि इन कामगारों को किए गए कुल भुगतान के 5% से अधिक नहीं होगी।
  • नियोजन की शर्तें: 
    • औद्योगिक संबंध संहिता (2020) ‘निश्चित अवधि के रोजगार (Fixed Term Employment: FTE)’ का प्रावधान करती है ताकि अधिक अनुबंध आधारित रोजगार को कम किया जा सके। 
    • साथ ही, किसी उद्योग के 51% श्रमिकों की सदस्यता वाले ट्रेड यूनियनों को श्रमिकों की ओर से वार्ता करने वाले श्रम संघ के रूप में मान्यता दी गई है।
  • कामगारों के अधिकार और सुरक्षित कार्य दशाएं: उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020 असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस प्रदान करती है। साथ ही, रोजगार की प्रकृति की वजह से हुई दुर्घटना या मृत्यु के मामले में पीड़ितों को क्षतिपूर्ति देने के प्रावधान करती है। 
  • अन्य सुधार
    • "शी-बॉक्स" (She-Box): कार्यस्थल पर महिला कर्मियों की सुरक्षा के लिए;
    •  ई-श्रम पोर्टल: असंगठित क्षेत्र के कामगारों के पंजीकरण और सहायता उपलब्ध कराने हेतु, आदि। 
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e-Shram portal

A national database for unorganized sector workers in India, aiming to register and collect data on these workers to facilitate the implementation of social security schemes and welfare programs.

She-Box (Sexual Harassment Electronic Box)

An online portal launched by the Ministry of Women and Child Development to provide a platform for women to report sexual harassment at the workplace. It aims to ensure a safe and secure working environment for women.

Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020

This code consolidates and amends laws relating to safety, health, and working conditions of workers. It aims to provide for worker safety, national databases for unorganized workers, and compensation for accidents or death.

Title is required. Maximum 500 characters.

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