परिसीमन और दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताएँ | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

दक्षिण भारत के राज्यों ने परिसीमन (Delimitation) को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि परिसीमन से संसद में उनका प्रतिनिधित्व असमान रूप से प्रभावित हो सकता है, अर्थात उनका प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। 

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताएँ

  • जनसंख्या नियंत्रण का विरोधाभास: जनसंख्या पर आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों की सीटों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम कर सकता है। इससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व  और प्रभाव घट सकता है। यह उन राज्यों को “दंडित” करने जैसा होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। 
  • संघवाद और क्षेत्रीय स्वायत्तता: प्रतिनिधित्व में व्यापक बदलाव से संघवाद कमजोर हो सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय नीतियाँ उत्तरी राज्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार अधिक बन सकती हैं।

परिसीमन क्या है?

  • यह वह प्रक्रिया है जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं।
  • सांविधानिक  प्रावधान:
    • अनुच्छेद 82 और 170: ये अनुच्छेद संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित प्राधिकार द्वारा और निर्धारित रीति से प्रत्येक राज्य के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों (लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों) का पुनर्समायोजन करने और सीमाओं में बदलाव करने का प्रावधान करते हैं। 
    • अनुच्छेद 330 और 332: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को पुनः निर्धारित करने का प्रावधान करते हैं।
  • परिसीमन आयोग:
    • संसद द्वारा अधिनियमित परिसीमन अधिनियम के आधार पर गठित यह आयोग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण करता है।
    • अब तक, 1952, 1962, 1972 और 2002 के परिसीमन आयोग अधिनियमों के तहत 4 बार परिसीमन आयोगों का गठन किया गया है। 
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

संघवाद (Federalism)

एक राजनीतिक व्यवस्था जिसमें सत्ता राष्ट्रीय सरकार और क्षेत्रीय सरकारों के बीच विभाजित होती है। परिसीमन में संघवाद की अवधारणा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को प्रभावित करती है।

परिसीमन अधिनियम (Delimitation Act)

यह संसद द्वारा पारित एक कानून है जो परिसीमन आयोग के गठन, उसकी शक्तियों और कार्यों को परिभाषित करता है। इस अधिनियम के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।

परिसीमन आयोग (Delimitation Commission)

यह एक उच्च-शक्ति प्राप्त निकाय है जिसे भारत में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य सौंपा जाता है। इसका गठन संसदीय कानून द्वारा किया जाता है और इसके आदेशों को अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet