जनांकिकीय परिवर्तन (डेमोग्राफिक ट्रांजिशन) का सिद्धांत तथा भारत पर इसके प्रभाव | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • आंध्र प्रदेश में तीसरे/चौथे बच्चे के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किए जाते हैं, जबकि दक्षिण भारत में प्रजनन दर प्रतिस्थापन दर से कम यानी 1.5 है।
  • जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत, जो अर्थव्यवस्थाओं के विकास के साथ उच्च से निम्न प्रजनन/मृत्यु दर में होने वाले बदलावों की व्याख्या करता है, थॉम्पसन और नोटेस्टीन द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
  • भारत को अंतर-राज्यीय जनसांख्यिकीय असमानताओं, बढ़ती निर्भरता अनुपात (2050 तक 347 मिलियन बुजुर्ग), राजकोषीय तनाव और जनसंख्या परिवर्तन से उत्पन्न राजनीतिक प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है।

In Summary

हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने जनांकिकीय परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर वित्तीय प्रोत्साहन देने की घोषणा की है।

  • भारत की प्रतिस्थापन प्रजनन दर (replacement fertility rate) 2.1 है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों में यह दर 1.5 (प्रतिस्थापन स्तर से नीचे) है।
    • प्रतिस्थापन दर (Replacement Rate) बच्चों की उस औसत संख्या को दर्शाती है, जितने बच्चों को एक महिला को जन्म देना चाहिए ताकि वह और उसका जीवनसाथी जनसंख्या में स्वयं के अनुपात के बराबर प्रतिस्थापित कर सकें। जैसे कि 'हम दो और हमारे दो'।  

जनांकिकीय परिवर्तन (संक्रमण) का सिद्धांत (DTT) के बारे में

  • यह सिद्धांत जनांकिकी में उच्च प्रजनन दर और उच्च मृत्यु दर के चरण से निम्न प्रजनन दर और निम्न मृत्यु दर के चरण में होने वाले परिवर्तन या ट्रांज़िशन का वर्णन करता है।
    • यह सिद्धांत व्याख्या करता है कि आर्थिक विकास के साथ किसी देश की जनांकिकीय संरचना किस प्रकार बदलती है।
    • जनांकिकीय परिवर्तन का सिद्धांत’ पद का प्रयोग सबसे पहले वारेन एस. थॉम्पसन (1929) द्वारा और बाद में फ्रैंक डब्ल्यू. नोटेस्टीन (1945) द्वारा किया गया था। 

भारत पर जनांकिकीय परिवर्तन के प्रभाव 

  • राज्यों में भिन्नता: युवा आबादी की उच्च हिस्सेदारी वाले राज्य (जैसे- बिहार, उत्तर प्रदेश) जनांकिकीय लाभांश की स्थिति में हैं। 
  • आश्रित आबादी का बढ़ता अनुपात: वर्ष 2050 तक प्रत्येक पाँच में से एक भारतीय की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होगी। यह संख्या लगभग वर्तमान 14.9 करोड़ से बढ़कर 34.7 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
  • राजकोष पर बोझ: अधिक वृद्ध आबादी वाले राज्यों में कर देने वाले लोगों की संख्या (tax base) कम होती जाएगी, जबकि पेंशन और स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं पर व्यय बढ़ता जाएगा। इससे अधिक ऋण और ब्याज भार के कारण राजकोषीय बोझ बढ़ेगा।
  • राजनीतिक प्रभाव: परिसीमन (Delimitation) और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में परिवर्तन हो सकता है, जहाँ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना होगी। 
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परिसीमन (Delimitation)

यह एक आयोग द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया है जो किसी देश में संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करता है। इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर सीटों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

कर देने वाले लोगों की संख्या (tax base)

यह किसी सरकार के लिए कर योग्य आय या व्यय की कुल मात्रा को संदर्भित करता है, जिससे कर राजस्व उत्पन्न होता है। वृद्ध आबादी बढ़ने से यह आधार कम हो सकता है।

आश्रित आबादी (Dependent Population)

यह जनसंख्या का वह वर्ग है जो आर्थिक रूप से सक्रिय नहीं है और दूसरों पर निर्भर है, जिसमें आमतौर पर बच्चे (0-14 वर्ष) और वृद्ध (60/65 वर्ष से ऊपर) शामिल होते हैं।

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