हाल ही में आंध्र प्रदेश सरकार ने जनांकिकीय परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर वित्तीय प्रोत्साहन देने की घोषणा की है।
- भारत की प्रतिस्थापन प्रजनन दर (replacement fertility rate) 2.1 है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों में यह दर 1.5 (प्रतिस्थापन स्तर से नीचे) है।
- प्रतिस्थापन दर (Replacement Rate) बच्चों की उस औसत संख्या को दर्शाती है, जितने बच्चों को एक महिला को जन्म देना चाहिए ताकि वह और उसका जीवनसाथी जनसंख्या में स्वयं के अनुपात के बराबर प्रतिस्थापित कर सकें। जैसे कि 'हम दो और हमारे दो'।
जनांकिकीय परिवर्तन (संक्रमण) का सिद्धांत (DTT) के बारे में
- यह सिद्धांत जनांकिकी में उच्च प्रजनन दर और उच्च मृत्यु दर के चरण से निम्न प्रजनन दर और निम्न मृत्यु दर के चरण में होने वाले परिवर्तन या ट्रांज़िशन का वर्णन करता है।
- यह सिद्धांत व्याख्या करता है कि आर्थिक विकास के साथ किसी देश की जनांकिकीय संरचना किस प्रकार बदलती है।
- ‘जनांकिकीय परिवर्तन का सिद्धांत’ पद का प्रयोग सबसे पहले वारेन एस. थॉम्पसन (1929) द्वारा और बाद में फ्रैंक डब्ल्यू. नोटेस्टीन (1945) द्वारा किया गया था।
भारत पर जनांकिकीय परिवर्तन के प्रभाव
- राज्यों में भिन्नता: युवा आबादी की उच्च हिस्सेदारी वाले राज्य (जैसे- बिहार, उत्तर प्रदेश) जनांकिकीय लाभांश की स्थिति में हैं।
- आश्रित आबादी का बढ़ता अनुपात: वर्ष 2050 तक प्रत्येक पाँच में से एक भारतीय की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होगी। यह संख्या लगभग वर्तमान 14.9 करोड़ से बढ़कर 34.7 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
- राजकोष पर बोझ: अधिक वृद्ध आबादी वाले राज्यों में कर देने वाले लोगों की संख्या (tax base) कम होती जाएगी, जबकि पेंशन और स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं पर व्यय बढ़ता जाएगा। इससे अधिक ऋण और ब्याज भार के कारण राजकोषीय बोझ बढ़ेगा।
- राजनीतिक प्रभाव: परिसीमन (Delimitation) और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में परिवर्तन हो सकता है, जहाँ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना होगी।
