एक हालिया अध्ययन के अनुसार वर्ष 2085 तक चरम मौसम की घटनाएं स्थलीय जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित एक अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 2085 तक स्थलीय कशेरुकी जीवों के 36% आवासों को कई चरम जलवायु घटनाओं का सामना करना पड़ेगा।
  • लू और जंगल की आग से सबसे ज्यादा खतरा है, और अमेज़न, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाए जाने वाले उभयचर और अन्य प्रजातियां सबसे अधिक असुरक्षित हैं।
  • यूएनएफसीसीसी, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क (30x30 लक्ष्य) और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली पर संयुक्त राष्ट्र दशक जैसी वैश्विक पहलों का उद्देश्य जोखिमों को कम करना है।

In Summary

'नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन' पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए जैव विविधता संरक्षण के साथ जलवायु शमन को तत्काल एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल देता है।

अध्ययन के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • संयुक्त खतरे: वर्ष 2085 तक 36% स्थलीय कशेरुकी (vertebrates) जीवों के पर्यावास कई चरम जलवायु घटनाओं (लू, वनाग्नि, सूखा, बाढ़) के प्रभाव में होंगे।
  • लू (Heatwaves) प्राथमिक खतरे के रूप में: अनुमान है कि 2085 तक लू 93% प्रजातियों के भौगोलिक क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। इसके बाद सर्वाधिक खतरा वनाग्नि से है।
  • वर्गिकी के आधार पर खतरे (Taxonomic Vulnerability): उभयचर प्रजातियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी, विशेषकर सूखे से।
    • इसके अलावा, देशज (नेटिव) प्रजातियों और सीमित भौगोलिक सीमा वाले जीवों पर विलुप्ति का अधिक खतरा है क्योंकि उनके पास सुरक्षित क्षेत्रों में जाने के विकल्प सीमित होते हैं।
  • भौगोलिक हॉटस्पॉट: अमेज़न बेसिन, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे प्रजाति-समृद्ध क्षेत्र इन संयुक्त खतरों के सबसे अधिक प्रभाव में हैं।  

स्थलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए वैश्विक पहलें

  • UNFCCC और पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौता: इनका लक्ष्य वैश्विक तापवृद्धि को सीमित करना और जलवायु परिवर्तन की वजह से जैव विविधता के समक्ष जोखिमों को कम करना है।
  • IPCC की सिफारिशें: इसकी छठी मूल्यांकन रिपोर्ट में लचीलेपन (रेजिलिएंस) विकसित करने के लिए 30-50% पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने पर जोर दिया गया है।
  • IUCN रेड लिस्ट और FAO की 'वन प्लैनेट, वन हेल्थ' पहल: ये पहलें जलवायु परिवर्तन की वजह से विलुप्ति का सामना कर रही जोखिम वाली प्रजातियों के संरक्षण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
  • कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (2022): जैव विविधता अभिसमय के तहत, इस फ्रेमवर्क का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 30% भूमि और महासागरों की रक्षा करना है (30x30 लक्ष्य)
  • संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली दशक (2021-2030): इसका उद्देश्य जीवों के निम्नीकृत पर्यावासों की पुनर्स्थापना को बढ़ावा देना है, जिससे प्रजातियों की सहनशीलता और अनुकूलन क्षमता बढ़ाई जा सके।
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली दशक

संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली दशक (UN Decade on Ecosystem Restoration) 2021-2030 तक मनाया जाने वाला एक वैश्विक आह्वान है, जिसका उद्देश्य निम्नीकृत (degraded) पारिस्थितिकी तंत्रों को बहाल करने के प्रयासों को बढ़ाना और प्रोत्साहित करना है। यह प्रजातियों के अस्तित्व और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायक है।

30x30 लक्ष्य

30x30 लक्ष्य (30x30 Target) कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क का एक प्रमुख उद्देश्य है, जिसका लक्ष्य 2030 तक पृथ्वी की कम से कम 30% भूमि और समुद्री क्षेत्रों को संरक्षित और प्रबंधित करना है। इसका उद्देश्य जैव विविधता के क्षरण को रोकना है।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity - CBD) के तहत 2022 में अपनाया गया एक ढाँचा है। इसका लक्ष्य 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को रोकना और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करना है, जिसमें '30x30 लक्ष्य' भी शामिल है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet