आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों के खिलाफ राज्यसभा सभापति को अयोग्यता याचिका सौंपी | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार दलबदल के आधार पर अयोग्यता राजनीतिक दल के विलय के मामले में लागू नहीं होती है।
  • यह प्रावधान करता है कि संसद के किसी सदन के किसी सदस्य को तब अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा जब उसका मूल राजनीतिक दल के कम से कम 2/3 सदस्यों के साथ किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय हो जाता है।
    • अयोग्यता याचिका में तर्क दिया गया है कि दसवीं अनुसूची के लिए मूल राजनीतिक दल का वास्तविक विलय आवश्यक है, न कि केवल सदन के सदस्यों का पाला बदलना।

In Summary

हाल ही में, आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई राज्यसभा-सांसदों ने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। इसके कारण पार्टी ने सभापति के समक्ष इन सदस्यों को अयोग्य ठहराने हेतु याचिका दायर की। हालांकि, राज्यसभा-सभापति ने इन सात सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी।

  • संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार दलबदल के आधार पर अयोग्यता राजनीतिक दल के विलय के मामले में लागू नहीं होती है।
  • यह प्रावधान करता है कि संसद के किसी सदन के किसी सदस्य को तब अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा जब उसका मूल राजनीतिक दल के कम से कम 2/3 सदस्यों के साथ किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय हो जाता है।
    • अयोग्यता याचिका में तर्क दिया गया है कि दसवीं अनुसूची के लिए मूल राजनीतिक दल का वास्तविक विलय आवश्यक है, न कि केवल सदन के सदस्यों का पाला बदलना।

दसवीं अनुसूची और सांसदों/विधायकों की अयोग्यता

  • इसे लोकप्रिय रूप से दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) कहा जाता है।
  • इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था।
    • 91वें संविधान संशोधन अधिनियम ने दल-बदल विरोधी कानून को मजबूत किया। इसने अयोग्यता से बचने के लिए किसी सदन में पार्टी के 1/3 सदस्यों की जगह 2/3 सदस्यों का विलय अनिवार्य कर दिया।
  • उद्देश्य: राजनीतिक दलबदल की समस्या से निपटना और लोकतंत्र की रक्षा करना।
  • सदस्यों की अयोग्यता के आधार:
    • स्वेच्छा से राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ना;
    • मतदान के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करना;
    • यदि निर्दलीय निर्वाचित सांसद या विधायक किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है;
    • यदि कोई मनोनीत (नॉमिनेटेड) सदस्य सदन का सदस्य बनने के छह महीने बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है।
  • निर्भीक और शीघ्र निर्णयों के लिए सांसदों के मामले में न्याय-निर्णयन का कार्य लोकसभा अध्यक्ष/राज्यसभा सभापति को सौंपा गया है, ताकि न्यायिक विलंब से बचा जा सके। 
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लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा सभापति (Lok Sabha Speaker / Rajya Sabha Chairman)

सांसदों की दलबदल के आधार पर अयोग्यता के मामलों में, क्रमशः लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति निर्णय लेते हैं। यह न्याय-निर्णयन न्यायपालिका के बजाय इन पदाधिकारियों को सौंपा गया है ताकि शीघ्र निर्णय लिया जा सके।

पार्टी व्हिप (Party Whip)

यह एक अनुशासन अधिकारी होता है जिसे राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त किया जाता है। व्हिप का कार्य पार्टी के सदस्यों को सदन में किसी विशेष मुद्दे पर कैसे मतदान करना है, इसके बारे में निर्देश देना होता है। पार्टी व्हिप का उल्लंघन अयोग्यता का कारण बन सकता है।

पार्टी विलय (Merger of Political Party)

संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, यदि किसी राजनीतिक दल के दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल हो जाते हैं, तो इसे विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों को दलबदल के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जाता है।

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