यह रूपरेखा केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जारी की है। यह रूपरेखा पूंजी, श्रम, नवाचार (इनोवेशन) एवं डिजिटल क्षेत्रों में ज्ञान आधारित योगदान को मापने का प्रयास करती है।
ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के बारे में
- परिभाषा: यह ऐसी उपभोग और उत्पादन प्रणाली है, जिसमें भौतिक संसाधनों और प्राकृतिक साधनों की तुलना में मानव पूंजी; जैसे कि जानकारी, कौशल, तकनीकी विशेषज्ञता और बौद्धिक संपदा के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
- ज्ञान के प्रकार:
- संहिताबद्ध ज्ञान (Codified Knowledge): ऐसी जानकारी जिसे सहज रूप से दस्तावेजों में दर्ज की जा सके और डिजिटल माध्यम से साझा किया जा सके (जैसे — क्या है और क्यों है)।
- अप्रत्यक्ष ज्ञान (Tacit Knowledge): अनुभव पर आधारित कौशल और क्षमताएं, जिन्हें लिखित रूप में व्यक्त करना और दूसरों तक पहुंचाना कठिन होता है, जैसे कि — कैसे करना है और किसके माध्यम से करना है।

- ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का महत्व:
- बढ़ते प्रतिफलों (रिटर्न) द्वारा संचालित: यह नवाचार के प्रसार, बार-बार उपयोग और दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि के माध्यम से लगातार बढ़ते आर्थिक लाभ उत्पन्न करती है।
- मूल्य सृजन में परिवर्तन: पेटेंट और कॉपीराइट जैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) के माध्यम से विज्ञान और नवाचार का व्यवसायीकरण करती है। OECD के प्रमुख देशों में ज्ञान-आधारित कार्य GDP में 50% से अधिक योगदान देते हैं।
- उच्च-कौशल युक्त रोजगार: यह उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर उत्पन्न करती है और कुशल “ज्ञान कर्मियों” की मांग बढ़ाती है।
- राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली: यह शिक्षा संस्थानों, सरकार और उद्योगों को जोड़ने वाले गतिशील नेटवर्क पर आधारित होती है, जो एक-दूसरे से सीखने और नवाचार के प्रसार को बढ़ावा देते हैं।
- ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के उदाहरण: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की डिजिटल इंडिया पहल, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी, आयुष (Ayush), जीआई टैग, आदि।