भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) पर स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (CoA) के निर्णय को खारिज किया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • भारत ने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के लिए मध्यस्थता न्यायालय (सीओए) को मान्यता नहीं दी है, क्योंकि वह इस विवाद को तटस्थ विशेषज्ञ के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत मानता है।
  • विश्व बैंक द्वारा सुगम बनाए गए 1960 के अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधन समझौते (आईडब्ल्यूटी) के अनुसार, पूर्वी नदियाँ भारत को और पश्चिमी नदियाँ पाकिस्तान को आवंटित की गई हैं, जिनमें विशिष्ट उपयोग अधिकार भी शामिल हैं।
  • औद्योगिक व्यापार प्रौद्योगिकी (IWT) के तहत विवाद समाधान में स्थायी सिंधु आयोग, एक तटस्थ विशेषज्ञ और संभावित रूप से एक मध्यस्थता न्यायालय शामिल होते हैं।

In Summary

भारत ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration: CoA) के गठन को कभी भी मान्यता नहीं दी। साथ ही, भारत ने सिंधु जल संधि को फिलहाल निलंबित कर रखा है।

स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (CoA) के बारे में 

  • यह पांच सदस्यीय मध्यस्थता कार्यदल है। इसका गठन 2023 में पाकिस्तान के अनुरोध पर किया गया था। इसमें पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन को चुनौती दी थी।
  • भारत का पक्ष: भारत ने इसकी कार्यवाही में भाग लेने से इनकार कर दिया, और यह तर्क दिया कि यह विवाद विश्व बैंक द्वारा नियुक्त 'तटस्थ विशेषज्ञ' के अधिकार क्षेत्र में आता है। 

सिंधु जल संधि (IWT) के बारे में  

  • परिचय:  यह संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी। विश्व बैंक (हस्ताक्षरकर्ता) ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इसका उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण को निर्धारित करना था।
  • संधि का दायरा: यह संधि सिंधु बेसिन की मुख्य नदियों पर लागू होती हैं। ये नदियां हैं; सतलुज, ब्यास, रावी (पूर्वी नदियां) तथा झेलम, चिनाब और सिंधु (पश्चिमी नदियां)।
    • संधि के अनुसार पूर्वी नदियों का समस्त जल भारत को बिना किसी प्रतिबंध के उपयोग हेतु आवंटित किया गया। वहीं, भारत पर यह दायित्व है कि वह पश्चिमी नदियों के जल को बहने दे, केवल घरेलू उपयोग, गैर-उपभोग्य उपयोग तथा संधि में अनुमत अन्य उपयोगों को छोड़कर। 

सिंधु जल संधि (IWT) के तहत विवाद समाधान प्रणाली

  • चरण 1- स्थायी सिंधु आयोग (PIC): इसमें प्रत्येक देश का एक आयुक्त होता है। इसकी बैठक प्रतिवर्ष बारी-बारी से दोनों देशों में आयोजित होती है।
  • चरण 2-तटस्थ विशेषज्ञ: यह विश्व बैंक द्वारा नियुक्त किया जाता है। इनके निर्णय बाध्यकारी प्रकृति के होते हैं।
  • चरण 3-मध्यस्थता न्यायालय (CoA): संधि के पक्षकारों के बीच सहमति होने पर या किसी भी पक्ष के अनुरोध पर इसका गठन किया जाता है।
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Western Rivers (Jhelum, Chenab, Indus)

Under the IWT, India is obligated to let the waters of these rivers flow, with limited allowances for domestic, non-consumptive, and other permitted uses.

Eastern Rivers (Satluj, Beas, Ravi)

Under the IWT, India has unrestricted rights to use the entire water of these rivers. These are tributaries of the Indus River system.

Neutral Expert

A technical authority, appointed by the World Bank or jointly by India and Pakistan, to resolve technical disputes arising from the Indus Water Treaty when the Permanent Indus Commission cannot reach an agreement.

Title is required. Maximum 500 characters.

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