79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा की मुख्य थीम थी, "वैश्विक स्वास्थ्य को फिर से आकार देना: एक साझा जिम्मेदारी" (Reshaping global health: a shared responsibility)। इस सभा के दौरान रोगाणुरोधी प्रतिरोध यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) सहित कई मुद्दों पर महत्वपूर्ण संकल्प अपनाए गए और कई निर्णय लिए गए।
रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर वैश्विक कार्य योजना (GAP-AMR) 2026–2036:

- परिचय: यह GAP-AMR का दूसरा संस्करण है। यह 2015 में अपनाई गई पहली योजना के एक दशक के कार्यान्वयन के अनुभवों पर आधारित है।
- लक्ष्य: वर्ष 2030 तक इंसानों में बैक्टीरियल AMR (रोगाणुरोधी प्रतिरोध) से जुड़ी मौतों में 10% की कमी लाना, कृषि-खाद्य प्रणालियों में रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग को घटाना तथा प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) से होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना ताकि 2024 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
- समन्वय: इसके लिए तकनीकी सहायता और समन्वय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके चार साझेदारों—खाद्य और कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH)—द्वारा प्रदान किया जाएगा।
रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के बारे में:
- अर्थ: रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी पर एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, एंटीफंगल जैसी रोगाणुरोधी दवाइयां प्रभावी सिद्ध नहीं होती।
- रोग के मामलें: AMR के कारण वर्ष 2050 तक प्रतिवर्ष 3.9 करोड़ (39 मिलियन) मौतें हो सकती हैं।
- AMR से निपटने हेतु प्रमुख पहले:
- भारत में : AMR पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) और 'रेड लाइन अवेयरनेस' अभियान।
- वैश्विक स्तर पर: WHO की 'वैश्विक रोगाणुरोधी प्रतिरोध और उपयोग निगरानी प्रणाली' (GLASS)।
79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में अपनाए गए अन्य प्रमुख संकल्प:
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