स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी फैक्टशीट में शांति स्थापना अभियानों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया गया है।
शांति स्थापना अभियानों के समक्ष प्रमुख चुनौतियां:
- वित्तपोषण की कमी: संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे दानदाताओं द्वारा अंशदान का भुगतान न करने के कारण संयुक्त राष्ट्र को 2 अरब डॉलर के वित्तपोषण की कमी का सामना करना पड़ा। इससे शांति-स्थापना कर्मियों की संख्या में भारी कटौती करनी पड़ी।
- भू-राजनीतिक गतिरोध: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो की धमकियों के कारण अभियानों के अधिदेश (mandate) का नवीनीकरण जटिल हो गया है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) जैसे मिशनों को समाप्त करने के लिए दबाव डाल रहा है।
- क्षेत्रीय मिशनों के वित्तपोषण को किसी अन्य उद्देश्यों में लगाना: उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ (EU) अपनी 'यूरोपीय शांति सुविधा' (EPF) के वित्तपोषण को अफ्रीका से हटाकर यूक्रेन और पश्चिम एशिया की ओर मोड़ रहा है।
- तदर्थ हस्तक्षेपों का उदय: उदाहरण के लिए, UAE जैसी मध्यम शक्तियां द्विपक्षीय सैन्य समझौतों का उपयोग कर रही हैं, जो दीर्घकालिक संघर्ष-समाधान के बजाय अल्पकालिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
- ग्लोबल साउथ पर असमान बोझ: शांति स्थापना अभियानों में सैनिक और पुलिस बल भेजने वाले शीर्ष 10 देश ग्लोबल साउथ से हैं। इनमें भारत भी शामिल है।
- शांति-स्थापना कर्मियों की तैनाती में ऐतिहासिक गिरावट: वर्ष 2025 में 34 देशों में 58 सक्रिय शांति मिशन चल रहे थे, जो 2016 के बाद पहली बार 60 से नीचे पहुंच गए।
- शांति स्थापना अभियानों को प्रभावी बनाने के लिए पूर्वानुमान के आधार पर वित्तपोषण, विकसित देशों द्वारा अधिक जिम्मेदारी साझा करना, और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय संगठनों के साथ मजबूत सहयोग की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के बारे में:
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