लद्दाख के उपराज्यपाल ने पुगा घाटी में 14,000 फीट की ऊँचाई पर इस भूतापीय संयंत्र की स्थापना के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को पाँच वर्ष के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी।
- संशोधित MoU के तहत, ONGC एक मेगावाट (MWe) का पायलट भू-तापीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करेगा। साथ ही, यह लद्दाख में भू-तापीय संसाधनों के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक दोहन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा।

भू-तापीय ऊर्जा के बारे में:
- अर्थ: यह पृथ्वी की भूपर्पटी (क्रस्ट) के भीतर निक्षेपित ऊष्मा का उपयोग करती है।
- भूतापीय ऊर्जा प्रणाली में कई घटक शामिल होते हैं, जैसे उत्पादन और पुनः इंजेक्शन (कुएँ, पंप), परिवहन (पाइपलाइन), वितरण (हीट एक्सचेंजर) और अंतिम उपयोग से जुड़े अनुप्रयोग।
- स्रोत:
- उच्च-एन्थैल्पी (तापीय धारिता) संसाधन: ज्वालामुखीय क्षेत्र, गीजर और हॉट स्प्रिंग्स, जिनका मुख्य उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
- निम्न से मध्यम-एन्थैल्पी संसाधन: जैसे गर्म चट्टानें और उथली भू-परतें, जो प्रत्यक्ष उपयोग (जैसे हीटिंग और कूलिंग, कृषि-खाद्य, जलीय कृषि) के लिए बेहतर होती हैं।

- भारत में क्षमता:
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने 381 हॉट स्प्रिंग्स की पहचान की है, जिनका धरातलीय तापमान 35°C से 89°C के बीच है।
- GSI ने भारत में 10 भूतापीय क्षेत्रों (प्रॉविन्सेज) की पहचान की है, जिसमें हिमालयी भू-तापीय क्षेत्र, अंडमान निकोबार द्वीप समूह आदि शामिल हैं।
- भारत में लगभग 10,600 मेगावाट की भू-तापीय ऊर्जा की क्षमता का अनुमान लगाया गया है। इनमें पुगा और चुमथांग क्षेत्र सर्वाधिक संभावना वाले क्षेत्र माने जा रहे हैं।
- राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति (2025): यह नीति भू-तापीय ऊर्जा को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिदृश्य के प्रमुख स्रोत के रूप में स्थापित करती है। यह वर्ष 2070 के 'नेट जीरो' लक्ष्य की प्राप्ति और ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देगी।