यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो असम पूर्वोत्तर क्षेत्र का पहला तथा उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश का तीसरा राज्य बन जाएगा, जिसने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) विधेयक पारित किया है।
- गोवा में देश की स्वतंत्रता से पहले से ही पुर्तगाली नागरिक संहिता (1867) के तहत समान नागरिक संहिता का एक रूप लागू है।
असम समान नागरिक संहिता विधेयक के मुख्य प्रावधान
- विवाह/तलाक: विवाह और तलाक के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
- उत्तराधिकार: इसमें संपत्ति के उत्तराधिकारियों में मृतक के पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता को शामिल किया गया है।
- लिव-इन रिलेशनशिप: इनका एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्में बच्चों को पूर्णतः वैध माना जाएगा।
- बहुविवाह: इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। बहुविवाह का दोषी सिद्ध होने पर 7 साल तक की कैद का प्रावधान है।
- आदिवासियों को उन्मुक्ति: इसके प्रावधान असम की किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होंगे।
UCC की आवश्यकता क्यों है?
- राज्य का पंथनिरपेक्ष स्वरूप बनाए रखने के लिए: भारत जैसे पंथनिरपेक्ष गणराज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान विधि लागू होनी चाहिए, न कि धार्मिक प्रथाओं के आधार पर अलग-अलग नियम।
- लैंगिकता आधारित न्याय सुनिश्चित करने के लिए: समान नागरिक संहिता व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) में विद्यमान भेदभावपूर्ण प्रावधानों को हटाकर लैंगिक न्याय यानी महिलाओं के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।
- राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण रखने के लिए: यह संहिता "एक राष्ट्र, एक विधि" के विचार को साकार करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि धार्मिक प्रथाएं विधिक एकरूपता में बाधा न डालें।
- अन्य: सभी नागरिकों को समान दर्जा प्रदान करने, कानूनों का सरलीकरण करने के लिए, आदि।
समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में
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