असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 पेश किया गया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • यदि असम का यूसीसी विधेयक पारित हो जाता है, तो यह उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा, जबकि गोवा में स्वतंत्रता-पूर्व पुर्तगाली नागरिक संहिता लागू है।
  • प्रमुख प्रावधानों में अनिवार्य विवाह/तलाक पंजीकरण, पति/पत्नी/बच्चों/माता-पिता के लिए विरासत के अधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण और अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर बहुविवाह के लिए 7 साल की कारावास की सजा शामिल है।
  • यूसीसी का उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता को कायम रखना, भेदभावपूर्ण व्यक्तिगत कानूनों को हटाकर लैंगिक न्याय को बढ़ावा देना और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का समर्थन करना है।

In Summary

यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो असम पूर्वोत्तर क्षेत्र का पहला तथा उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश का तीसरा राज्य बन जाएगा, जिसने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) विधेयक पारित किया है। 

  • गोवा में देश की स्वतंत्रता से पहले से ही पुर्तगाली नागरिक संहिता (1867) के तहत समान नागरिक संहिता का एक रूप लागू है। 

असम समान नागरिक संहिता विधेयक के मुख्य प्रावधान

  • विवाह/तलाक: विवाह और तलाक के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। 
  • उत्तराधिकार: इसमें संपत्ति के उत्तराधिकारियों में मृतक के पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता को शामिल किया गया है। 
  • लिव-इन रिलेशनशिप: इनका एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। लिव-इन रिलेशनशिप से जन्में बच्चों को पूर्णतः वैध माना जाएगा। 
  • बहुविवाह: इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। बहुविवाह का दोषी सिद्ध होने पर 7 साल तक की कैद का प्रावधान है।
  • आदिवासियों को उन्मुक्ति: इसके प्रावधान असम की किसी भी अनुसूचित जनजाति  पर लागू नहीं होंगे

UCC की आवश्यकता क्यों है?

  • राज्य का पंथनिरपेक्ष स्वरूप बनाए रखने के लिए: भारत जैसे पंथनिरपेक्ष गणराज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान विधि लागू होनी चाहिए, न कि धार्मिक प्रथाओं के आधार पर अलग-अलग नियम।
  • लैंगिकता आधारित न्याय सुनिश्चित करने के लिए: समान नागरिक संहिता व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) में विद्यमान भेदभावपूर्ण प्रावधानों को हटाकर लैंगिक न्याय यानी महिलाओं के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।
  • राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण रखने के लिए: यह संहिता "एक राष्ट्र, एक विधि" के विचार को साकार करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि धार्मिक प्रथाएं विधिक एकरूपता में बाधा न डालें। 
  • अन्य: सभी नागरिकों को समान दर्जा प्रदान करने, कानूनों का सरलीकरण करने के लिए, आदि।

समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में

  • परिभाषा: UCC का अर्थ व्यक्तिगत कानूनों की एक ऐसी एकीकृत प्रणाली से है, जो धर्म से परे सभी नागरिकों पर लागू होती है। इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, बच्चों को गोद लेना और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे विषय शामिल हैं।  
  • संविधान का अनुच्छेद 44: राज्य की नीति के नीति निदेशक तत्व (DPSP) के तहत संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को निर्देश देता है कि वह पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करे। 
  • उच्चतम न्यायालय के निर्णय: उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न मामलों (जैसे सरला मुद्गल वाद, 1995 आदि) पर सुनवाई करते हुए लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए UCC लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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Title is required. Maximum 500 characters.

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