नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में क्वाड देशों; भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया।
घोषित की गई प्रमुख पहलें
- क्वाड क्रिटिकल-मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क: यह 20 अरब डॉलर की एक पहल है। इसका उद्देश्य खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में निवेश का समन्वय करना है। इससे वैश्विक अति-महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ बनाया जाएगा।
- हिंद-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग (IPMSC): प्रारंभ में इसका मुख्य ध्यान हिंद महासागर क्षेत्र पर होगा। यह पहल क्वाड देशों की संयुक्त निगरानी क्षमताओं का उपयोग करके वास्तविक समय में सूचना साझा करने तथा समुद्री गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायता करेगी।
- क्वाड ऊर्जा सुरक्षा पहल: इस पहल के माध्यम से क्वाड के साझेदार देश खुले और स्थिर ऊर्जा बाजार तथा विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की पहचान करेंगे।
- हिंद-प्रशांत संपर्क या कनेक्टिविटी: वर्ष 2026 तक प्रशांत द्वीपीय मंच के देशों को समुद्र में जल के नीचे बिछाई गई केबलों से जोड़ने का संकल्प लिया गया है। साथ ही, क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर पार्टनरशिप के तहत फिजी में बंदरगाह अवसंरचना को विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
बैठक के अन्य महत्वपूर्ण परिणाम
- UNCLOS के प्रति प्रतिबद्धता: क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS) का अनुपालन करने पर जोर दिया ताकि लाल सागर, होमुर्ज जलसंधि और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहे।
- तटरक्षक बल के नेतृत्व में ‘क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन’: समुद्री गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए भारत इस मिशन के अगले संस्करण की मेजबानी करेगा।
- 6G संचार: क्वाड देश मिलकर अगली पीढ़ी के संचार मानकों, विशेष रूप से 6G तकनीक के विकास पर कार्य करेंगे।
क्वाड (QUAD) के बारे में
भारत के लिए क्वाड का महत्व
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